Saturday, June 13, 2026
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कैलाश मानसरोवर यात्रा: पहले जत्थे को दिखाई गई हरी झंडी, 15 जून को पहुंचेगा सिक्किम

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नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने 12 जून को नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में यात्रा के पहले जत्थे को औपचारिक रूप से रवाना किया। यह पहला दल नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेगा। यह जत्था 15 जून को दिल्ली से आगे की यात्रा शुरू करेगा।

इस अवसर पर विदेश राज्य मंत्री ने चयनित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि यात्रियों के लिए हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअली उद्घाटित नए अनुकूलन केंद्रों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने उत्तराखंड, सिक्किम और उत्तर प्रदेश सरकारों सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सभी एजेंसियां श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर यात्रा अनुभव देने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

इससे पहले सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अध्यक्ष लुकेंद्र रासैली ने बताया कि पहले जत्थे के यात्री 11 जून को ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां उनका अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण, फिटनेस जांच, वीजा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं विदेश मंत्रालय की निगरानी में पूरी की जा रही हैं। यह जत्था 15 जून को गंगटोक पहुंचेगा और 20 जून को नाथूला दर्रे के जरिए तिब्बत में प्रवेश करेगा।

वर्ष 2015 में शुरू किए गए नाथूला मार्ग को कैलाश मानसरोवर यात्रा के वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित किया गया था। इस वर्ष करीब 1,500 आवेदनों में से कंप्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से 500 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। इन्हें 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में भेजा जाएगा और अंतिम जत्था अगस्त में रवाना होगा।

गंगटोक पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुकूल बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा। पहले उन्हें लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित 18वें मील के अनुकूलन केंद्र में दो रातें बितानी होंगी, इसके बाद करीब 13,000 फीट ऊंचाई पर स्थित हंगू झील क्षेत्र में दो रातें रुकना होगा। इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय निगरानी और स्थानीय भ्रमण भी कराया जाएगा। अंतिम स्वास्थ्य जांच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा की जाएगी, जिसके बाद यात्रियों को 14,140 फीट ऊंचे नाथूला दर्रे को पार करने की अनुमति मिलेगी।

तिब्बत में प्रवेश के बाद यात्री कांगमा, लाजी, झोंगबा और दारचेन होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत पहुंचेंगे। यात्रा के दौरान श्रद्धालु कैलाश परिक्रमा करेंगे, जिसमें दिरापुक और जुथुलपुक जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। इसके बाद सभी यात्री उसी मार्ग से भारत लौटेंगे।

एसटीडीसी के अध्यक्ष ने बताया कि 2025 में कई वर्षों के अंतराल के बाद यात्रा दोबारा शुरू होने के बाद इस बार बुनियादी ढांचे, आवास सुविधाओं, चिकित्सा सहायता और संपर्क व्यवस्था में व्यापक सुधार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रशासन पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक तैयार है।

करीब 22 दिनों की इस यात्रा में दिल्ली में दस्तावेज और स्वास्थ्य जांच के लिए चार दिन, सिक्किम में अनुकूलन के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन का प्रवास शामिल रहेगा। पूरी यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय, आईटीबीपी, आयुष मंत्रालय, चिकित्सा दलों और सिक्किम सरकार के अधिकारी श्रद्धालुओं की सहायता और निगरानी करेंगे।