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कलबुर्गी के इस मंदिर में मन्नत पूरी होने पर गणेश जी को लगाया जाता है रंग

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कलबुर्गी, 14 सितंबर (आईएएनएस)। देशभर में गणेश चतुर्थी को लेकर उत्सव का माहौल देखने को मिल रही है। दूसरी ओर, वर्षों से कर्नाटक के कलबुर्गी में स्थित एक प्राचीन गणेश मंदिर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां मन्नत पूरी होने के बाद भक्त गणेश जी की प्रतिमा पर रंग लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आईएएनएस से बातचीत में स्थानीय निवासी इरन्ना ने बताया कि मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है और इसकी ऊंचाई करीब 12 से 13 फीट बताई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहले यह प्रतिमा धीरे-धीरे बढ़ रही थी। पूजा-अर्चना में कठिनाई न हो, इसलिए पूर्वजों ने प्रतिमा की बढ़ती ऊंचाई को रोकने के लिए विशेष उपाय किया था। लोग यहां आते हैं और भगवान गणेश से मन्नत पूरी होने पर मूर्ति को रंगते हैं। बहुत से लोग उनमें विश्वास करते हैं और अलग-अलग राज्यों से लोग उनकी पूजा करने आते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर यहां आते हैं और मन्नत पूरी होने पर गणेश जी को रंग लगाते हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं और करीब 14 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जाती है।

स्थानीय निवासी प्रवीण के मुताबिक, यह ऐतिहासिक गणेश मंदिर करीब 200 साल पुराना माना जाता है और आसपास के क्षेत्र के लाखों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि मंदिर की स्वयंभू गणेश प्रतिमा को लेकर कई तरह की स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं।

प्रवीण ने कहा कि मान्यता है कि प्रतिमा पहले छोटी थी और समय के साथ बढ़कर करीब 12 से 15 फीट तक पहुंच गई। स्थानीय लोगों के बीच यह भी विश्वास है कि प्रतिमा के बढ़ते जाने से भविष्य में पूजा-अर्चना में परेशानी हो सकती थी, इसलिए गणेश जी के सिर के ऊपर कील लगाने से जुड़ी एक पुरानी मान्यता प्रचलित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने की मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। उन्होंने सरकार से मंदिर तक आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की है।