Tuesday, July 21, 2026
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चिंता, डर और बेचैनी को दूर करती है कमल मुद्रा, बढ़ाती है सकारात्मक सोच

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नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से थका हुआ नजर आता है। ऐसे में योग जीवन को संतुलन बनाने में मदद करता है। योग में कुछ ऐसी मुद्राएं हैं, जिनका प्रभाव बेहद गहरा होता है। इन्हीं में से एक है सुखासन में पद्म मुद्रा, जिसे कमल मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह मुद्रा शरीर को स्थिरता देती है।

पद्म मुद्रा का नाम संस्कृत शब्द ‘पद्म’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है कमल। जब इस मुद्रा को सुखासन में बैठकर किया जाता है, तो शरीर स्वाभाविक रूप से स्थिर रहता है और ध्यान भीतर की ओर केंद्रित हो जाता है।

सुखासन में पद्म मुद्रा करने से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है। यह मुद्रा सीधे तौर पर हृदय चक्र से जुड़ी मानी जाती है। जो भावनात्मक दबाव, डर या नकारात्मक सोच जैसी समस्या से जूझ रहा हो, उनके लिए यह मुद्रा बेहद लाभकारी मानी जाती है। नियमित अभ्यास से भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है और मन हल्का महसूस करता है।

मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुखासन पद्म मुद्रा को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह मुद्रा गहरी और शांत श्वास को प्रोत्साहित करती है, जिससे नर्वस सिस्टम शांत होता है। तनाव और चिंता की स्थिति में यह मुद्रा मन को स्थिर करने में मदद करती है। यह अभ्यास धीरे-धीरे अवसाद और बेचैनी जैसी समस्याओं को कम करता है।

पद्म मुद्रा करते समय शरीर पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम की ओर सक्रिय होता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है। जिन लोगों को एसिडिटी, अपच या पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उन्हें नियमित अभ्यास से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, यह मुद्रा शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह संतुलित करती है, जिससे थकान कम होती है और ऊर्जा का स्तर बेहतर बना रहता है।

पद्म मुद्रा के नियमित अभ्यास से न केवल मन शांत होता है, बल्कि सोच धीरे-धीरे सकारात्मक और जीवन संतुलित होने लगता है।