बेंगलुरु, 9 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच इंटरनेशनल कन्नड़ फेडरेशन ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से एक अहम मांग की। महासंघ ने सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित वैश्विक निवेश एवं विदेशी मामलों का मंत्रालय किसी मौजूदा मंत्री को अतिरिक्त प्रभार के रूप में न दिया जाए, बल्कि इसके लिए एक स्वतंत्र और पूर्णकालिक मंत्री नियुक्त किया जाए।
यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब नई मंत्रालय के गठन को लेकर सरकार के भीतर कुछ मंत्रियों के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं।
यह पत्र वैश्विक प्रवासी कन्नड़ समुदाय (एनआरके) की ओर से डॉ. रोनाल्ड कोलाको, प्रवीण शेट्टी और जकारिया जोकट्टे ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को भेजा है।
महासंघ ने सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें प्रवासी कन्नड़ समुदाय के लिए अलग मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन का कहना है कि यह कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए एक महत्वपूर्ण वादे को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है।
महासंघ ने उन आशंकाओं को भी खारिज किया कि नया मंत्रालय बनने से दूसरे विभागों के अधिकार कम हो जाएंगे। पत्र में कहा गया है कि यह मंत्रालय बड़े और मध्यम उद्योग, पर्यटन, आईटी-बीटी तथा कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करेगा।
पत्र के अनुसार, प्रस्तावित मंत्रालय कर्नाटक, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, उद्यमियों और दुनिया भर में बसे कन्नड़ समुदाय के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा। साथ ही यह वैश्विक निवेश आकर्षित करने, निर्यात बढ़ाने और नई तकनीकों के आदान-प्रदान के लिए एक सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में भी कार्य करेगा।
महासंघ का दावा है कि इस मंत्रालय से दुनिया भर में रहने वाले 30 लाख से अधिक प्रवासी कन्नड़ समुदाय को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, प्रवासी समुदाय से जुड़े कर्नाटक के 1.2 करोड़ से अधिक परिवारों के कल्याण, सुरक्षा और आपातकालीन जरूरतों में भी यह मंत्रालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
महासंघ ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से अपील की है कि इस मंत्रालय को केवल अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में न देखा जाए। इसके लिए ऐसे पूर्णकालिक मंत्री की नियुक्ति की जाए, जिसे वैश्विक अनुभव, प्रशासनिक समझ और प्रवासी कन्नड़ समुदाय की चुनौतियों की गहरी जानकारी हो।

