बेंगलुरु, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार विजेता 81 वर्षीय मोहम्मद मीरान साहेब ने कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत वोटर-लिस्ट वेरिफिकेशन का सामना कर रहे प्रवासी भारतीय (एनआरई) को एक साल की मोहलत दें।
सीईओ को लिखे पत्र में मोहम्मद मीरान साहेब ने कहा कि कई एनआरआई, खासकर उडुपी और कारवार के रहने वाले लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कम समय में भारत लौटने में मुश्किल हो सकती है।
मोहम्मद मीरान ने सीईओ को लिखे पत्र में कहा, “मैं 1974 से दुबई में रह रहा हूं। मैं मूल रूप से उडुपी जिले का रहने वाला हूं और बेंगलुरु में भी मेरा घर है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। हालांकि, समुदाय का एक सीनियर सदस्य होने के नाते, कई युवा एनआरआई खासकर उडुपी और कारवार जिलों से मुझसे संपर्क कर रहे हैं और वोटर लिस्ट से अपना नाम हटवाने के बारे में सलाह और मदद मांग रहे हैं। उनमें से कुछ लोग अपने-अपने इलाको के बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के संपर्क में भी हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें 20 सितंबर से पहले भारत आने और अपनी नागरिकता व अन्य जानकारी से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज व सबूत पेश करने की सलाह दी गई है।”
उन्होंने कहा, “हालांकि हम सही वोटर लिस्ट बनाए रखने और चुनाव अधिकारियों की जरूरतों को पूरा करने के महत्व को पूरी तरह समझते हैं, लेकिन एनआरआई की स्थिति पर कुछ व्यावहारिक और मानवीय नज़रिए से विचार करने की जरूरत है। कई एनआरई कई दशकों से भारत के बाहर रह रहे हैं। इस लंबे समय के दौरान, हो सकता है कि उनके पास वे पुराने दस्तावेज़ न हों या उन्हें आसानी से न मिलें जिनकी मांग अब अधिकारी कर रहे हैं। कई मामलों में उनके रिकॉर्ड और दस्तावेज भारत और उनके रहने वाले देश के बीच बिखरे हुए हैं, जिससे तुरंत नियमों का पालन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोगों से बहुत कम समय में भारत आने के लिए कहना कई व्यावहारिक मुश्किलें पैदा करता है।”
मोहम्मद मीरान ने कहा, “कई लोग भारत में गर्मियों की छुट्टियों के बाद हाल ही में अपने रहने वाले देशों में लौटे हैं। कम समय में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने में काफी खर्च आता है। कई एनआरई अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं और उनके बच्चे स्कूल जाते हैं, जिससे तुरंत यात्रा करना खास तौर पर मुश्किल हो जाता है। मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर अनिश्चितता और अतिरिक्त चिंताएं पैदा करती है। ऐसे में एनआरआई को एसाआईआर के लिए एक वर्ष का समय दिया जाए।”
