जम्मू, 24 अगस्त (आईएएनएस)। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही कथित आतंकी धमकियों पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हर धमकी को गंभीरता से लेना चाहिए और सरकार को चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सुरक्षा बलों के प्रमुखों को शामिल कर एक ठोस सुरक्षा प्लान बनाना चाहिए।
पूर्व डीजीपी वैद ने कहा कि केंद्र सरकार के पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित ‘सॉफ्ट टारगेट’ हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित दफ्तरों में तैनात किया जाए, आत्मरक्षा की ट्रेनिंग और हथियार दिए जाएं। साथ ही उन्होंने धमकियों के पीछे के अंदरूनी नेटवर्क को बेनकाब कर कड़ी सजा देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसी हर धमकी को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि इसे हल्के में लेना चाहिए। मेरा मानना है कि सरकार को एक सीनियर अधिकारी, चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सिक्योरिटी फोर्स के प्रमुख को शामिल करके एक सुरक्षा प्लान बनाना चाहिए। मैं इस पर चर्चा करना चाहूंगा कि पैकेज के तहत घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। वे आसान और ‘सॉफ्ट’ टारगेट हैं, जिन्हें आतंकवादी निशाना बनाना चाहते हैं। वे सुरक्षा बलों का सामना नहीं कर सकते और उनकी संख्या कम हो रही है। इसीलिए आतंकवादी ऐसे आसान टारगेट की तलाश में हैं।
वैद ने कहा कि मैं सुरक्षा प्लान इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि कुछ दफ्तर काफी सुरक्षित होते हैं, जैसे डिप्टी कमिश्नर ऑफिस, डायरेक्टोरेट, सचिवालय। इन जगहों पर कोई भी हथियार लेकर नहीं आ सकता है। इस तरह के दफ्तरों में कश्मीरी पंडितों की ड्यूटी लगाएं। मेरा यह भी मानना है कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी देनी चाहिए। इसके साथ ही क्या करना है और क्या नहीं, इसकी भी जानकारी देनी चाहिए। इन्हें हथियार भी देने चाहिए, ताकि कोई अगर हमला कर रहा है, तो ये भी अपनी सुरक्षा कर सकें।
उन्होंने कहा कि ये धमकियां कहां से आ रही हैं, इसकी तह तक जाना चाहिए। जिस तरह से फोन नंबर और गाड़ियों की जानकारी उन तक पहुंच रही है, मुझे लगता है कि कोई अंदर का आदमी है। उसकी पहचान करके, उसे सीधा लाल चौक पर उल्टा करके टांगना चाहिए। अगर वो शख्स यहां नहीं है, तो जैसे इजरायल कहता है, सात अक्टूबर 2023 की घटना को अंजाम देने वाला शख्स ‘डेड मैन वॉकिंग ऑन द अर्थ’ है, वैसे ही भारत को भी करना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि वो चंद दिनों का मेहमान है, उसे खत्म कर देना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर की पुलिस विंग एसआईए ने वंधामा नरसंहार केस खोला है। इसे लेकर उन्होंने कहा कि एसआईए जो कर रहा है, वो बहुत अच्छा है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाने से मना किया, उसके बावजूद भी एसआईए ने पहले सरला भट्ट का केस निकाला, उसके बाद एक और हत्या का मामला था और अब ये तीसरा मामला है। यह जरूरी है। ये कौन लोग थे? कोई भी चश्मदीद अगर जिंदा है, तो उसके बयान लिए जाने चाहिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स होंगे, जो मिल सकती है, वो लेनी चाहिए। हालांकि, 25 साल निकल गए हैं, लेकिन फिर भी जो सबूत मिल सकते हैं, उसके आधार पर काम होना चाहिए।
एनएसए अजीत डोभाल चीन दौरे पर हैं। इसे लेकर पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा, “एनएसए डोभाल चीन गए हैं और वहां विदेश मंत्री से मिलने वाले हैं। अगले महीने ब्रिक्स समिट होने वाली है, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी आने की उम्मीद है। इसलिए, समिट से पहले कोशिश की जा रही है, क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तनाव का एक बड़ा कारण है। इस मुद्दे पर समझौता हो सकता है, क्योंकि सीमा अभी भी ठीक से तय नहीं हुई है।”

