Thursday, July 16, 2026
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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने महाप्रभु जगन्नाथ के किए दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था में 19 आईपीएस अधिकारियों की तैनाती

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पुरी, 16 जुलाई (आईएएनएस)। महाप्रभु जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने महाप्रभु के दर्शन किए। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि आज हमें महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा देखने को मिल रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जल्द ही ‘पहांडी’ रस्म शुरू होगी, जिसमें महाप्रभु को उनके भाई और बहन के साथ रस्मों के साथ उनके रथों तक लाया जाएगा। यह देखने का मौका उन्हीं लोगों को मिलता है जिन पर विशेष कृपा होती है और मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे महाप्रभु के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।

जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी जगन्नाथ स्वाइन दास महापात्र ने आईएएनएस से कहा, “आज पवित्र श्री गुंडिचा यात्रा है, जो दुनिया का सबसे शुभ दिन है। इस दिन भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह बहुत खास दिन है। भगवान जगन्नाथ के दर्शन देने के लिए बाहर आने से बढ़कर कोई और पल नहीं हो सकता।

आईजी सत्यजीत नाइक ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “महाप्रभु के रथ उत्सव को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु आएंगे। इसके लिए पुलिस ने 19 आईपीएस अधिकारियों समेत पुलिस बल की 220 प्लाटून के साथ सुरक्षा का एक व्यापक और कई स्तरों वाला प्लान तैयार किया है। तटीय सुरक्षा के लिए हमने जहाजों से गश्त करने के लिए नेवी और कोस्ट गार्ड के साथ तालमेल बिठाया है। हमने रेलवे सुरक्षा के लिए भी योजना बनाई है।

वहीं, बिहार की राजधानी पटना में इस्कॉन प्रचारक हरिलाल दास ने बताया कि इस्कॉन मंदिर से निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी शामिल हो सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित समारोह के दौरान इस्कॉन के पुजारी चैतन्य दास प्रभु ने रथ यात्रा के महत्व पर बात की। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि रथ यात्रा के अवसर पर मैं सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। इस्कॉन कोलकाता की 55वीं रथ यात्रा के समारोह में आपका स्वागत है। जिस तरह पुरी के राजा पारंपरिक रूप से रथ यात्रा का आयोजन करते रहे हैं, उसी तरह यह पवित्र परंपरा आज भी जारी है।