नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) के ऑक्शन पोर्टल एनएएफईएक्स डॉट इन की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘नाफेड’ ने एक प्रकार से नेफिक्स डॉट इन, दृष्टि, ईआरपी और नाफेड कल्याण के रूप में चार पहलों की शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि जो नाफेड 2014 में बंद होने की कगार पर आ गया था, वह आज 500 करोड़ मुनाफे और 30 हजार करोड़ टर्नओवर के साथ देश के 74 लाख किसानों की सहायता कर रहा है। 2014 में नाफेड गहरे आर्थिक संकट था। नाफेड के अधिकारियों ने पीएम मोदी के साथ बैठक की। इसके बाद भारत सरकार ने आर्थिक मदद करके नाफेड को फिर से मजबूती के साथ चालू किया।
सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि उस वक्त मैं पार्टी का अध्यक्ष था। मुझे पता है कि नाफेड गहरे आर्थिक संकट में था। आने वाले दो वर्षों में सहकारिता मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा दलहन का एक दाना भी व्यापारियों के माध्यम से न आए बल्कि सीधे किसानों के पास से आए। इससे किसानों को सीधा मुनाफा पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही दलहन का दाम किसानों तक पहुंचेगा, अपने आप दलहन का रकबा बढ़ने लगेगा और देश एक प्रकार से दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों से सीधे खरीद के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बना दिया गया है। अब इंफ्रास्ट्रक्चर को नीचे तक पहुंचाना है। मेरा मानना है कि नाफेड की ओर से भी दृढ़ता के साथ शुद्ध तरीके से काम करना होगा, तभी जाकर परिणाम मिलेंगे।
अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेरे जैसे कई भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए 23 जून का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक विधान, एक निशान और एक प्रधान के सूत्र को चरितार्थ और देश को एकजुट रखन के लिए अपना बलिदान दिया था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस देश के बड़े नेता रहे हैं। उन्होंने प्रसिद्धि के लिए कुछ नहीं किया और उन्होंने जो कुछ किया, उसके दूरगामी परिणाम रहे। अंग्रेजों के साथ लड़ाई लड़ने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की अखंडता के लिए पूरे जीवन संघर्ष क।

