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किसी भी उम्र में हो सकता है मेनिनजाइटिस, जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

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नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। मेनिनजाइटिस दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों में होने वाला संक्रमण या सूजन है। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और कुछ मामलों में तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस खास तौर पर गंभीर चिंता का विषय है।

मेनिनजाइटिस कई कारणों से हो सकता है। इसके लिए बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और कुछ परजीवी जिम्मेदार हो सकते हैं। बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस के प्रमुख कारणों में मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस शामिल हैं। किस उम्र में किस रोगजनक का खतरा अधिक है, यह व्यक्ति की उम्र, प्रतिरक्षा क्षमता और संक्रमण के संपर्क जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस का खतरा अधिक हो सकता है, जबकि बच्चों और किशोरों में मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा महत्वपूर्ण कारण हैं।

इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता और भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में दौरे पड़ना, बेहोशी या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ नजर आएं, यह जरूरी नहीं है।

शिशुओं में मेनिनजाइटिस के लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। बच्चा सामान्य से कम सक्रिय हो सकता है, उसे जगाना मुश्किल हो सकता है, वह लगातार चिड़चिड़ा रह सकता है, ठीक से दूध नहीं पी सकता या लगातार कमजोर आवाज में रो सकता है। कुछ मामलों में सिर के ऊपरी हिस्से का मुलायम स्थान यानी फॉन्टानेल भी उभर सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मेनिनजाइटिस का संक्रमण किस तरह फैलेगा, यह उसके कारण पर निर्भर करता है। कई बैक्टीरिया नाक और गले में मौजूद हो सकते हैं और सांस की बूंदों या गले के स्राव के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों और लंबे समय तक नजदीकी संपर्क वाली परिस्थितियों में कुछ संक्रमणों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।

बचाव की बात करें तो टीकाकरण मेनिनजाइटिस के कुछ सामान्य बैक्टीरियल कारणों से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा के खिलाफ टीके उपलब्ध हैं। इसके अलावा हाथों की नियमित सफाई रखना और संक्रमित व्यक्ति के साथ करीबी संपर्क तथा कप, बर्तन या टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत चीजें साझा करने से बचना भी जरूरी है। किसी मेनिंगोकोकल संक्रमण वाले व्यक्ति के करीबी संपर्क में आने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीबायोटिक से बचाव की सलाह दे सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेनिनजाइटिस को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, तेज सिरदर्द, भ्रम, बार-बार उल्टी, दौरे या तेजी से बिगड़ती हालत जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस में इलाज शुरू करने में देरी स्थिति को और गंभीर कर सकती है।