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क्रोंच पर्वत पर बसा कार्तिक स्वामी मंदिर, जहां मूर्ति नहीं अस्थियों की होती है पूजा

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देहरादून, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में अनेक रहस्यमयी और पौराणिक मंदिर स्थित हैं, जिनमें कार्तिक स्वामी मंदिर का अपना एक विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर के शिखर से त्रिशूल, नंदा देवी और चौखंबा जैसी बर्फ से ढकी हिमालय की भव्य चोटियों के अद्भुत नजारे दिखाई देते हैं।

गौरतलब है कि इस मंदिर में भगवान कार्तिकेय की मूर्ति की जगह उनकी पवित्र अस्थियों (शिला रूप में) की पूजा की जाती है। बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मंदिर के बारे में बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर लिखा, “रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद कार्तिक स्वामी मंदिर, भगवान शिव के सबसे बड़े बेटे और दिव्य सेना के कमांडर भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक दिव्य और पवित्र जगह है। ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक आभा, पुरानी धार्मिक मान्यताओं और चारों ओर से फैली मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के कारण एक खास जगह रखता है।

उन्होंने लिखा, “आस्था, प्रकृति और हिमालयी संस्कृति का यह अनोखा संगम उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को और भी समृद्ध बनाता है। आपको भी रुद्रप्रयाग की अपनी यात्रा के दौरान इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए।”

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में क्रोंच पर्वत के शिखर पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार, जब भगवान कार्तिकेय और गणेश जी को ब्रह्मांड के चक्कर लगाने को कहा गया, तो कार्तिकेय जी यात्रा पर निकल गए और गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही अपना ब्रह्मांड माना। इससे रुष्ट होकर कार्तिकेय जी ने अपने शरीर का त्याग कर दिया और अपनी हड्डियां (अस्थियां) भगवान शिव को अर्पित कर दीं थी।

मान्यता है कि इस मंदिर के गर्भ गृह में भगवान कार्तिकेय की अस्थियां आज भी मौजूद हैं। यहां उनकी पाषाण रूपी आकृति या प्रतीकात्मक स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां कार्तिक पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के पर्व पर विशेष मेल और अनुष्ठान होते हैं।

मंदिर परिसर में सैकड़ों घंटियां बंधी हैं, जिनकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। मान्यता है कि इस शांत व पवित्र हिमालयी क्षेत्र में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।