Wednesday, May 27, 2026
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लद्दाख में नशे के खिलाफ बड़े अभियान की तैयारी, एलजी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

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लेह, 27 मई (आईएएनएस)। लद्दाख में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने मंगलवार को एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, धार्मिक संगठन और एनजीओ शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में नशे की स्थिति का आकलन करना और इसके खिलाफ प्रभावी उपायों पर चर्चा करना था।

बैठक के दौरान एलजी ने नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ड्रग कार्टेल्स को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही वाहनों की जांच, स्थानीय टैक्सियों की निगरानी और जोजिला तथा सरचू जैसे प्रवेश बिंदुओं पर कड़ी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

एलजी ने स्कूलों, कॉलेजों और पर्यटक स्थलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी विशेष निगरानी रखने को कहा है ताकि युवाओं को नशे के प्रभाव से बचाया जा सके। उन्होंने एकीकृत हेल्पलाइन ‘112’ स्थापित करने का भी निर्देश दिया, जिसके माध्यम से परिवार और मरीजों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एक समर्पित टीम बनाई जाएगी, जो परिवहन और पुनर्वास सेवाओं का समन्वय करेगी।

इसके अलावा, महाबोधि करुणा चैरिटेबल अस्पताल के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाने की भी योजना है। इसके तहत मनोचिकित्सकीय निगरानी में ध्यान और रिट्रीट आधारित उपचार सत्रों की सुविधा दी जाएगी, जिससे पुनर्वास को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

एलजी ने कहा कि नशा समाज और युवाओं के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे के शिकार लोगों के लिए परामर्श, उपचार और पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर ‘नशामुक्त लद्दाख’ के लक्ष्य को हासिल करने की अपील की।

इससे पहले लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो भी मौजूद थीं। एलजी ऑफिस के मुताबिक इस बात पर सहमत हुए कि विकास की पहलों और राजनीतिक बातचीत, दोनों ही मामलों में एक सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मैंने वांगचुक को आगाह किया कि वे कोई भी ऐसी भ्रामक और भड़काऊ कहानी न गढ़ें, जिससे सार्वजनिक चर्चा का माहौल खराब हो। लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि झूठी बातें गढ़ी जाएं और लोगों को भड़काया जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि लद्दाख की स्थिति की तुलना मणिपुर से करना उनके फैसले में एक चूक थी।