सुकमा, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कोंटा विकासखंड के अंतर्गत नियद नेल्लानार ग्राम पोलमपल्ली की करतम सविता ने यह साबित कर दिया है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही सहयोग मिल जाए तो ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह आसान हो सकती है।
जिला सीईओ मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान से जुड़कर सविता ने मजदूरी पर निर्भर जीवन से बाहर निकलते हुए अपने परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार किया है।
सविता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि पहले उनका परिवार दिहाड़ी मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर था, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी, लेकिन ‘प्रिया स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बदलाव आया। समूह के माध्यम से 60 हजार रुपए का ऋण लेकर उन्होंने ‘कृति किराना स्टोर’ की शुरुआत की। यह छोटा सा व्यवसाय अब उनके परिवार की आय का मजबूत आधार बन चुका है और गांव में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो गई है।
सविता आज अपनी किराना दुकान से सालाना 1 से 2 लाख रुपए तक की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। यह आय न केवल आर्थिक मजबूती दे रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और परिवार की खुशहाली का भी आधार बन गई है।
सविता कहती हैं कि अब उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता, बल्कि दुकान से नियमित आमदनी होती है, जिससे परिवार में सुख-शांति और स्थिरता आई है। उनके व्यवसाय में परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित हो रहा है।
जिला कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि जिले में नवाचार के तहत दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने के लिए चार ‘सेवा एक्सप्रेस’ संचालित की जा रही हैं। इनके जरिए अब तक लगभग साढ़े पांच हजार महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है, जो जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सविता ने कहा कि सरकारी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के सपनों को साकार करने का अवसर दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से उन्हें मजदूरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका मिला। आज वह आत्मनिर्भर हैं और उनकी जैसी कई महिलाएं इन योजनाओं के जरिए नई पहचान बना रही हैं।

