Sunday, June 7, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय लाओस के राष्ट्रपति के साथ सीएमजी का विशेष साक्षात्कार

लाओस के राष्ट्रपति के साथ सीएमजी का विशेष साक्षात्कार

0
7

बीजिंग, 7 जून (आईएएनएस)। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) ने हाल में चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर में लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव, राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ का इंटरव्यू किया।

इस मौके पर थोंग्लौन ने कहा कि इस साल लाओस और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65वीं वर्षगांठ है और लाओस-चीन मित्रवत वर्ष भी है। लाओ लोक गणराज्य की स्थापना के बाद से अब तक लाओस-चीन संबंध लगातार गहरे, मज़बूत और व्यापक होते जा रहे हैं। भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग और राजनयिक संबंध बेहतर, ज्यादा मजबूत और गहरे होंगे और उच्च स्तर की ओर बढ़ेंगे।

थोंग्लौन ने कहा कि वर्तमान चीन यात्रा के दौरान मैंने हांगचो में कई हाई-टेक कंपनियों का दौरा किया और चीन में आधुनिक तकनीक के विकास के बारे में जाना। देखा जा सकता है कि चीन आधुनिक प्रौद्योगिकी, एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय विकास के लिए अहम क्षेत्र मानता है। यह लाओस के लिए अच्छा अनुभव है। हम दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाएंगे।

थोंग्लौन ने आगे कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी के समान आदर्श हैं। हमारे बीच दिर्घकालीन सहयोग और बेहतर संबंधों का लंबा इतिहास है और इसका लगातार विकास होगा। लाओस और चीन ने दीर्घकालिन, स्थिर व व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की और साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की पुष्टि भी की। हमारी आपसी समझ हमारे दोनों देशों को समाजवादी रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करेगी।

इस साल चीन में 15वीं पंचवर्षीय योजना और लाओस में 10वीं पंचवर्षीय योजना का पहला साल है। इस बारे में थोंग्लौन ने कहा कि इस विशेष वर्ष में हम दोनों पक्ष संबंधित मुद्दों पर सलाह मशविरा और समन्वय करेंगे, ताकि राष्ट्रीय विकास में लाओस चीन के फ़ायदेमंद अनुभव पूर्ण रूप से सीख सके। चीन हमेशा लाओस का समर्थन करता है। हमारे बीच घनिष्ठ समन्वय कायम रहेगा और कभी नहीं बदलेगा।

थोंग्लौन ने यह भी कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तुत सभी वैश्विक पहलों में देशों के बीच संबंधों पर जोर दिया जाता है। चाहे बड़े हो और छोटे, सभी देशों के साथ समान व्यवहार और आपसी सम्मान किया जाना चाहिए। सभी देशों को वैश्वीकरण के रास्ते पर एकतरफावाद का विरोध करने के साथ बहुपक्षवाद को प्रोत्साहित करना होगा, ताकि विचार-विमर्श के जरिए बहुध्रुवीय दुनिया को बढ़ावा दिया जा सके।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)