रांची, 12 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता बच्ची से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि लापता बच्चों की पहचान व तलाश के लिए आधार कार्ड संबंधी सूचनाओं के उपयोग को लेकर स्पष्ट एसओपी (मानक कार्यप्रणाली) तैयार करने पर विचार करे।
लापता बच्ची की मां ने इस मामले को लेकर हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। इस पर गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए मामले में जांच की प्रगति पर भी राज्य की पुलिस और सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्ची की मां के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। कोर्ट के निर्देश पर गुमला के डीएसपी व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना के प्रभारी भी अदालत में उपस्थित रहे और जांच से संबंधित अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।
अदालत को बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है। यह टीम पूर्व में दिल्ली जाकर संभावित ठिकानों पर जानकारी जुटा चुकी है। बच्ची की तस्वीर विभिन्न माध्यमों से प्रसारित और अपलोड कराई गई है, ताकि पहचान में मदद मिल सके। हालांकि, अब तक बच्ची का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है और उसकी तलाश जारी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लापता बच्चों के मामलों में तकनीक के प्रभावी उपयोग की जरूरतों की बात की। अदालत ने कहा कि आधार से जुड़े डाटा के विधिसम्मत उपयोग के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार की जाए, ताकि जांच एजेंसियों को मदद मिल सके और निजता से जुड़े पहलुओं का भी संतुलन बना रहे।
गौरतलब है कि पूर्व की सुनवाई में अदालत राज्य में बच्चों की तस्करी, घुमंतू समूहों की निगरानी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणियां कर चुकी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि लापता बच्चों के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और राज्य को ठोस नीति के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। ताजा सुनवाई में अदालत ने जांच की प्रगति पर संतोषजनक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

