नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना में वरिष्ठ स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है। लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क ने भारतीय सेना में उपसेना प्रमुख (क्षमता विकास एवं सस्टेनेंस) का पदभार संभाला है। गुरुवार को उन्होंने यह महत्वपूर्ण पद व जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क पश्चिमी मोर्चे पर एक कोर के कमांडर के रूप में अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे।
नई नियुक्ति के अंतर्गत लेफ्टिनेंट जनरल विर्क भारतीय सेना की क्षमता विकास और उसे बनाए रखने से जुड़ी पहलों की निगरानी करेंगे। बदलते सुरक्षा माहौल में सेना की सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत और प्रभावी बनाए रखना इस जिम्मेदारी का अहम हिस्सा होगा। इससे एक दिन पहले को भारतीय सेना के कई अधिकारी सेवानिवृत्त हुए।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी। सेना प्रमुख ने राष्ट्र के प्रति उनके निस्वार्थ और समर्पित सेवा भाव की सराहना की। ये अधिकारी बुधवार को अपनी सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त हुए। सेना के अनुसार, उनका योगदान केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। अपने अनुभव, मूल्यों और ज्ञान के माध्यम से वे आगे भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
सेना प्रमुख ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के योगदान को भारतीय सेना की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। भारतीय सेना ने भी उनके समर्पण और सेवा को सलाम करते हुए उनके भविष्य के प्रयासों के लिए सफलता की शुभकामनाएं दीं। इस तरह एक ओर भारतीय सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का नया अध्याय शुरू हुआ, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक राष्ट्र की सेवा करने वाले अधिकारियों को सम्मान के साथ विदाई दी गई।
इसी बीच, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और भारतीय सेना के सभी रैंकों ने मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं हैं। इस अवसर पर सेना ने एकीकृत रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मुख्यालय की भूमिका के प्रति सम्मान व्यक्त किया। गौरतलब है कि भारतीय हर मोर्चे पर लगातार अपनी तैयारी मजबूत कर रही है।
बीते सप्ताह ही सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने जम्मू-कश्मीर में चिनार कोर के अग्रिम इलाकों का दौरा किया था। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और सेना की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उन्होंने नियंत्रण रेखा और अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की और सैनिकों से बातचीत भी की थी।
सेनाध्यक्ष ने तंगधार में ‘ऑपरेशन दृष्टि 2026’ का भी जायजा लिया था। सेनाध्यक्ष का यह दौरा ‘जय से विजय’ की उस भावना को सामने लाया, जिसमें अभियानगत सतर्कता के साथ हर योद्धा के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है। उत्तरी कमान के तहत आने वाली चिनार कोर के क्षेत्रों में पहुंचे सेनाध्यक्ष को स्थानीय कमांडरों ने मौजूदा सुरक्षा माहौल से अवगत कराया था। यहां सेना प्रमुख को अभियानगत तैयारियों और क्षमताओं को विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।
उन्हें नियंत्रण रेखा पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उपायों और अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों की तैयारियों के बारे में भी बताया गया था।
