Saturday, July 11, 2026
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मदरसों की ग्रांट बंद करने के फैसले पर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने उठाए सवाल, सीएम को दी ‘राजधर्म’ निभाने की सलाह

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नई दिल्‍ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने उत्तराखंड सरकार के मदरसों को ग्रांट (अनुदान) बंद करने के फैसले, सीएम योगी आदित्‍यनाथ के बयान और अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए जंग पर प्रतिक्रिया दी।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि उत्तराखंड सरकार जिस तरह से कुछ समय से काम कर रही है, उससे वहां मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल लगातार बन रहा है। मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है। देश को संविधान के अनुसार चलना चाहिए, और संविधान हर धर्म के लोगों को अपने संस्थान चलाने का अधिकार देता है।

उन्‍होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार, मदरसे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। वे शिक्षा को सुलभ बनाने में मदद कर रहे हैं। शिक्षा के साथ-साथ वे कुरान और धार्मिक शिक्षा भी देते हैं। साथ ही वे लोगों को शिक्षित करने की सरकारी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। मदरसों की वजह से बड़ी संख्या में लोग शिक्षित हो रहे हैं। आज मदरसे सिर्फ अरबी और कुरान सिखाने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वहां सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। हिंदी, अंग्रेजी और कई अन्य विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा, “हमारे देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं और हर धर्म को मानने वाले अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में यह कहना कि पिछली सरकारों ने घाटों पर नमाज की सुविधा दी और मौजूदा सरकार पूजा-पाठ करवाती है, नफरत, बंटवारे और सामाजिक ध्रुवीकरण वाली सोच को दिखाता है।

उन्‍होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री, जो एक संवैधानिक पद पर हैं और संविधान को बनाए रखने की शपथ लेकर काम कर रहे हैं, उन्हें सभी धर्मों के लोगों को समान नजरिए से देखना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के लिए संविधान सबसे ऊपर होना चाहिए। किसी खास धर्म के मानने वालों के प्रति नफरत नहीं होनी चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि सभी को न्याय दिलाना उस पद की जिम्मेदारी है। सीएम योगी एक धार्मिक व्यक्ति और साधु हैं, इसलिए उनसे हमारी उम्मीदें और भी ज्‍यादा हैं कि वे ‘राज धर्म’ का पालन करेंगे। राज धर्म का मतलब है सभी के साथ समान व्यवहार करना, सभी को न्याय दिलाना, किसी के खिलाफ नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा न देना और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखना। किसी को भी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि सरकार सिर्फ एक धार्मिक समुदाय को आगे बढ़ा रही है और दूसरे को दबाने की कोशिश कर रही है। अगर ऐसी सोच बनती है तो यह एक विफलता है।”

सलीम इंजीनियर ने कहा कि मैं यूपी सरकार और वहां के मंत्री को यही कहना चाहूंगा कि सबके साथ न्‍याय करें और राजधर्म को निभाएं।

इसी क्रम में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा से जंग शुरू होने को लेकर जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा, “अमेरिका ने शुरू से ही यह रवैया अपनाया है, और ईरान को पहले से ही इसकी अच्छी तरह जानकारी थी। जब समझौता हुआ था, तब भी यह कहा गया था कि उम्मीद है कि इसे ईमानदारी से लागू किया जाएगा। अब आप देख सकते हैं कि इस समझौते का उल्लंघन किया गया है। शायद अमेरिका को लगा कि ईरान में वह जो सत्ता परिवर्तन चाहता था, उसे हासिल नहीं किया जा सका।

उन्‍होंने कहा कि ईरान के लोग अपनी मौजूदा सरकार के साथ मजबूती से खड़े रहे। हालांकि उन्हें कई कुर्बानियां देनी पड़ीं, कई प्रमुख नेताओं को खोना पड़ा और काफी नुकसान उठाना पड़ा, फिर भी हम ईरान के लोगों और वहां की सरकार को बधाई देना चाहेंगे कि उन्होंने उन ताकतों का डटकर सामना किया जिन्हें वे दमनकारी मानते हैं और उनके मकसद को कामयाब नहीं होने दिया।

मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि अमेरिका इजराइल के दबाव में काम कर रहा है। इजराइल हर तरह से अमेरिका को बढ़ावा दे रहा है ताकि यह टकराव जारी रहे। नेतन्‍याहू को राजनीतिक तौर पर बचाने के लिए यह जंग जारी की जा रही है।