महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ महागठबंधन का लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर: उपेंद्र कुशवाहा

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पटना, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिरने पर कहा कि यह दिन भारत के राजनीतिक इतिहास के ऊपर एक काला दिवस के रूप में अंकित हो गया है।

उन्होंने रविवार को एक बयान जारी कहा कि जैसा कि सर्वविदित है, एनडीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा में महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कुशवाहा ने आगे कहा कि परिसीमन विधेयक सीधे तौर पर लोकतंत्र की नींव ‘समान प्रतिनिधित्व’ के सिद्धांत से जुड़ा है। पिछले कई दशकों से देश की जनगणना में भारी वृद्धि हुई है जिससे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि एक प्रतिनिधि के लिए सभी की समस्या का निवारण करना कठिन है।

उन्होंने कहा, “परिसीमन से सीटों का पुनर्गठन होना था जिससे हर नागरिक की आवाज को विधायिका (लोकसभा और विधानसभा) में बराबर का अधिकार मिलता, लेकिन महागठबंधन के कुटिल चाल के कारण महिलाओं, युवाओं और सभी नागरिकों का अधिकार उनसे छिन गया, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।”

उन्होने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुरूप परिसीमन विधेयक से संपूर्ण देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में सीटों की संख्या में डेढ़ गुनी वृद्धि होती। बिहार में भी लोकसभा के सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा में 243 से बढ़कर 365 सीट हो जाती, जिसका सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लाभ बिहार के आम आवाम को समग्र रूप से मिलता। दूसरी तरफ महिला आरक्षण विधेयक से भी एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होता जो उनके लिए नए अवसर सृजित करता।

बता दें कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा परिसीमन के विषय को लंबे समय से उठाते रहे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा बिक्रमगंज, गया, मुजफ्फरपुर, और पटना में ‘संवैधानिक अधिकार-परिसीमन सुधार’ विषय पर महारैली का आयोजन भी किया गया है।