महिला उत्पीड़न पर सरकार सख्त, बलिया के बीडीओ निलंबित

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लखनऊ, 16 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान के मुद्दे पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बलिया में तैनात एक खंड विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया है। महिला कर्मचारी के लैंगिक उत्पीड़न के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, बलिया में तैनात खंड विकास अधिकारी श्रवण प्रसाद गुप्ता के खिलाफ महिला कर्मचारी ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी बलिया की ओर से गठित स्थानीय परिवाद समिति ने जांच की।

समिति की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद शासन ने तत्काल प्रभाव से अधिकारी को निलंबित कर दिया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शासनादेश के मुताबिक, जांच में संबंधित अधिकारी पर कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम-2013 यानी पॉश एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप पाए गए हैं। यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के भी विपरीत माना गया है।

शासन ने अधिकारी के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी प्रस्तावित की है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी दफ्तरों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।

यदि किसी के खिलाफ शिकायत जांच में सही पाई जाती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार सुशासन, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक शुचिता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

— आईएएनएस

विकेटी/वीसी