नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में मां कालरात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना की जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, मध्य प्रदेश के देवास और मैहर के मंदिरों में शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
प्रयागराज में स्थित ललिता देवी मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पावन शक्तिपीठ मंदिर है, जहां शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर भक्तों ने मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की। शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में भक्तों ने चुनरी, नारियल, फल, फूल, मिष्ठान माता रानी को अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
मंगला आरती के साथ ही मंदिर में दर्शन और पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात्रि तक चलेगा। वहीं, शाम को माता रानी का भव्य श्रृंगार भी किया जाएगा। इन नौ दिनों में मां ललिता देवी मंदिर में शतचंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ भजन कीर्तन ऐसे तमाम धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। मंदिर में सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो और दर्शन पूजन कर सुगमता के साथ अपने गंतव्य को जा सकें।
नवरात्रि के सातवें दिन देवास की प्रसिद्ध माता टेकरी पर दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पहुंचे। प्रातः आरती में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मां चामुंडा माता के दरबार में कुछ श्रद्धालु ऐसे भी होते हैं जो मन्नत मांगते हैं और घुटनों के बल चलकर यहां पहुंचते हैं। माता का मंदिर अति प्राचीन है, इसे रक्त-पेट भी कहा जाता है क्योंकि माता सती का यहां पर रक्त गिरा था। मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।
इसी तरह, मैहर स्थित त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा शक्तिपीठ धाम में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर के प्रधान पुजारी पवन जी महाराज (दाऊ सरकार) ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान मैहर नगरी पूरी तरह भक्तिमय माहौल में नजर आई।
