पटना, 14 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने केंद्र सरकार के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म को एसओपी का पालन करने को कहा गया है।
उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह बिल्कुल सही कदम है। मौजूदा समय में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसे देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म एसओपी का पालन करें।
उनके मुताबिक, चाइल्ड एब्यूज के मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है। इससे पहले मेरे अलावा 20 से ज्यादा सांसदों ने इस मुद्दे को संसद में उठाने का काम किया था। यही नहीं, सरकार की ओर से इस संबंध में आश्वासन भी दिया गया था कि जरूर कुछ कदम उठाए जाएंगे। मेरा खुद मानना है कि अगर सोशल मीडिया को लेकर एक ठोस एसओपी स्थापित नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और ज्यादा विकट हो सकती है, जो हमें आगे चलकर परेशान कर सकती है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम इसे लेकर अभी से ही गंभीरता बरत लें।
इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बनी युद्ध जैसी स्थिति को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अमेरिका का रवैया निराशाजनक रहा है। नई दुनिया को गढ़ने की दिशा में उनका रवैया एक माफिया की तरह बनता जा रहा है। उनकी जुबां और कार्यशैली काफी निराशाजनक है, जो चिंता का विषय है। अमेरिका और इजरालय ने बच्चियों के स्कूल को बम से उड़ा दिया था। उधर, गाजा की स्थिति कैसी है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। मुझे लगता है कि इन चीजों को अलग-अलग दृष्टि से देखने की जरूरत नहीं है।
राजद सांसद मनोज झा ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की कार्यशैली पर भी निराशा जाहिर की। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र को बंद कर देना चाहिए या नहीं, तो उसे विभिन्न देशों की ओर से शक्ति प्रदान की जाना चाहिए, ताकि वो गलत को गलत कह सके।
वहीं, उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक गिरोह ने इस वारदात को अंजाम दिया है। इन लोगों ने राम मंदिर का बेजा इस्तेमाल किया है। मैं तो ढूंढ रहा हूं कि उन महापुरुषों को जिनकी जुबां से एक लफ्ज नहीं निकल रहा है। मनोज झा ने कहा कि मैं उन लोगों को खोज रहा हूं, जिन्होंने राम मंदिर को लेकर बाकायदा गाना तक बनाया था। आखिर ये लोग कहां छुप गए हैं।

