SGSU Advertisement
Home राजनीति मेक इन इंडिया के 12 साल: ड्रोन सेक्टर में नीति बदलाव और...

मेक इन इंडिया के 12 साल: ड्रोन सेक्टर में नीति बदलाव और पीएलआई से बढ़ा बाजार: स्मित शाह

0
4

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। मेक इन इंडिया अभियान के 12 साल पूरे होने पर ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मित शाह ने ड्रोन सेक्टर में हुए बदलावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत नीतिगत बदलाव, ड्रोन नियम 2021, पीएलआई स्कीम और विदेशी ड्रोन के आयात पर लगाई गई पाबंदियों से देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा मिला है।

स्मित शाह ने आईएएनएस से कहा कि मेक इन इंडिया के विजन का ड्रोन सेक्टर को बड़ा फायदा मिला है। इस विजन के तहत तीन प्रमुख बदलाव हुए। उन्होंने पहला बदलाव इज ऑफ डूइंग बिजनेस और पॉलिसी ओपनिंग को बताया। शाह ने कहा कि ड्रोन रुल्स 2021 के जरिए सरकार ऐसा रेगुलेशन लाई, जिससे देश में ड्रोन से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम खुला और इस क्षेत्र में काम करने के अवसर बढ़े।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई स्कीम के माध्यम से वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया। इससे देश में ड्रोन निर्माण को बढ़ाने और घरेलू उद्योग को मजबूत करने में मदद मिली। नीतिगत बदलाव और वित्तीय प्रोत्साहन के साथ विदेशी ड्रोन के आयात पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का फैसला भी महत्वपूर्ण रहा। इससे भारत में ही ड्रोन के निर्माण को बढ़ावा देने का अवसर मिला।

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट ने दावा किया कि इन नीतिगत हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप भारत के ड्रोन सेक्टर में तेजी से विस्तार हुआ है। एक समय देश के ड्रोन उद्योग का कुल बाजार करीब 60 करोड़ रुपए का था, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 3 से 4 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो वर्षों में ड्रोन सेक्टर का बाजार कम से कम 19 से 20 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

स्मित शाह ने कहा कि ड्रोन सेक्टर में हुए बदलाव किसी एक कदम का परिणाम नहीं हैं, बल्कि मेक इन इंडिया के व्यापक विजन के तहत किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों का नतीजा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश के सामने रखे गए मेक इन इंडिया विजन ने ड्रोन सहित कई क्षेत्रों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। ड्रोन सेक्टर में नीति को खोलने, मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने और विदेशी ड्रोन के आयात पर पाबंदी जैसे कदमों ने भारत में घरेलू ड्रोन उद्योग के विकास का आधार तैयार किया।