कोलकाता, 14 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील के रूप में हाई कोर्ट में पेश होने के बाद उठे विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले पर पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं और कहा है कि बिना पंजीकरण के वकालत करना नियमों के खिलाफ है।
देबजीत सरकार ने कहा कि कोई भी एलएलबी पास करने के बाद भी वकालत नहीं कर पाता है। उसे बार काउंसिल से अनुमति की जरूरत होती है। बिना बार काउंसिल में पंजीकरण के कोई भी वकालत नहीं कर सकता और न ही वकील की ड्रेस पहन सकता है। यह नियम है।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी कोर्ट में गईं और सवाल भी पूछा, लेकिन उन्होंने वकील की ड्रेस पहनी हुई थी। इससे पहले उन्हें पंजीकरण कराना था। इसका उल्लंघन ठीक नहीं है। इसे बंद करना चाहिए। जो पंजीकृत नहीं है, वह कैसे कोर्ट रूम में सवाल कर सकता है।
देबजीत सरकार ने कहा कि वकील के तौर पर पेश होने से पहले पंजीकरण होना चाहिए। दूसरा, अगर कोई प्रैक्टिस कर रहा है और सरकारी पद ग्रहण करने के बाद उसे निलंबन में जाना होता है। एक पत्र के जरिए निलंबन मिल जाता है, कम से कम जानकारी तो देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के कानून के साथ उन्हें खिलवाड़ नहीं करना चाहिए और उन्हें कोई मौका भी नहीं मिलना चाहिए। एक पूर्व मुख्यमंत्री ऐसा काम कैसे कर सकती हैं? टीएमसी देश के कानून, भाषा और संविधान के खिलाफ रही है और अभी भी वही कर रही है।
देबजीत सरकार ने यह भी कहा कि भारत में समाज के लिए जो भी नियम या योजनाएं लागू की जा रही हैं, उनका फायदा सबको मिलना चाहिए। केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ पश्चिम बंगाल के लोगों को नहीं मिला, लेकिन अब इसका फायदा सबको मिलेगा।
स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किए जाने पर उन्होंने कहा कि इससे जुड़े लगभग सभी लोग पश्चिम बंगाल के हैं, तो इसका गायन होना ही चाहिए। स्कूल में गायन तो होगा ही।

