नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। मौलाना साजिद रशीदी के ‘इस्लामिक कानून’ वाले बयान पर संतों की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए राम कचहरी चार धाम मंदिर के महंत ने कहा, “मौलाना साजिद रशीदी की मांग किसी भी हाल में पूरी नहीं होगी। उनका मकसद कभी पूरा नहीं होगा। बेबुनियाद और बेतुकी बातें करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जब तक भारत में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता, तब तक रेप नहीं रुकेंगे।” उन्होंने कहा कि मौलाना को होशो-हवास में बात करनी चाहिए। जिस तरीके से मौलाना साजिद रशीदी की ओर से भारत को खुलेआम चैलेंज किया जा रहा है, उनकी बिसात ही क्या है।
महंत शशिकांत दास ने आगे कहा, “साजिद रशीदी मिट जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी उनका हश्र पूरा नहीं होगा। भारत को बर्बाद करने के लिए कितने लोग आए और चले गए; वे खुद बर्बाद हो गए। जिन्होंने भारत की ओर गंदी दृष्टि दिखाई, आज उनकी क्या स्थिति है? उनका भी हश्र यही होगा।”
संत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा, “यह मौलाना पागल हो गया है; खुद के मजहब के बारे में इसको रत्ती भर ज्ञान नहीं है। अगर ज्ञान होता तो यह ऐसी बात नहीं बोलता, जिस पर लोगों की हंसी आ जाए। इनको देश के बारे में अनाप शनाप बोलना बंद करना चाहिए। उनका यह गैर-जिम्मेदाराना बयान है। इसको अपने मजहब के बारे में विधिवत आंकलन करना चाहिए।
एक और संत ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। इस तरह का बयान देकर समाज को गुमराह करने वाले लोग, जिन्होंने अपनों पर अत्याचार किया हो, वे देश और समाज को क्या दे पाएंगे? समाज को गुमराह करने वाली बात जो करता है, उन नकारात्मक विचारधारा वाले लोगों को इस तरह का बयान देने का कोई अधिकार नहीं बनता है। मुगल शासन के दौरान इन्होंने अपनों पर अत्याचार किया। ये मौलाना वही कुंठित विचारधारा की बात कर रहे हैं।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यही इसकी खूबी है। यहां पर न जाने कितने मजहब को मानने वाले लोग रहते हैं, वे अपने धर्म के अनुसार चलते हैं। संविधान से इसकी आजादी मिली है। इसी आजादी की वजह से पूरी दुनिया में भारत की पहचान है। जिन लोगों की ओर से शरियत कानून के लागू करने की बात कही जाती है, वह भारत में मुमकिन नहीं है। टकराव की स्थिति किसी भी सूरत में न तो देश और न तो समाज के हित में है।
