मॉड्यूल की छत से लटककर फोटो लेते नजर आए शुभांशु शुक्ला, बोले- स्पेस में दिशा बस आपसी सहमति की बात

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नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्पेस से जुड़े अनोखे अनुभवों को प्रशंसकों के साथ साझा करते रहते हैं। साल 2025 में 18 दिन के सफल मिशन के बाद भारत लौट चुके शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर एक दिलचस्प पोस्ट किया है, जिसमें वह आईएसएस मॉड्यूल की छत से लटकते हुए फोटो खिंचते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आईएसएस पर कोई निश्चित ऊपर या नीचे नहीं होता बल्कि अंतरिक्ष यात्री आपस में तय करते हैं कि किस दिशा को क्या मानना है। शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा, “ऑर्बिट में दिशा का मतलब ही पूरी तरह बदल जाता है। ग्रैविटी न होने की वजह से ‘ऊपर’, ‘नीचे’ और ‘फर्श’ जैसे शब्द बस पुरानी यादों से ज्यादा कुछ नहीं रह जाते।”

उन्होंने बताया कि स्पेस में आप खुद को ऐसी जगहों पर आराम करते पाते हैं, जहां धरती पर होने पर लोग आपकी परवरिश पर सवाल उठा सकते हैं। अपनी शुरुआती दिनों की एक रोचक घटना का जिक्र करते हुए शुभांशु ने बताया, “स्टेशन पर शुरुआती दिनों में मेरा दिमाग फर्श पर चलने की आदत पर अड़ा रहता था, भले ही वहां कोई खास फर्श होती ही नहीं। एक बार जब मैं एक मॉड्यूल से गुजरने का इंतजार कर रहा था, तभी एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे छत की तरफ ले जाकर कहा- “यहां चलो।”

शुभांशु ने लिखा, “बस उसी पल मुझे समझ आ गया कि अंतरिक्ष में दिशा का मतलब बस आपसी सहमति की बात है।” उन्होंने इस पोस्ट में छत से लटकते हुए अपनी फोटो भी शेयर की है और कहा कि यह फोटो तो अच्छी आई है, लेकिन जो उन्होंने खुद खींची थी, वह इससे कहीं बेहतर थी।