नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए एक बयान पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बीच भाजपा नेताओं ने ओवैसी पर बेतुकी बातें कहने का आरोप लगया है।
दरअसल, भागवत ने कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। ओवैसी ने इसे संघ की पुरानी चाल बताया। साथ ही यह भी कहा था कि आरएसएस ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया था. आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार उस समय कांग्रेस में थे, लेकिन उन्हें गांधी का हिंदू-मुस्लिम एकता का समर्थन करना पसंद नहीं था। इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। ओवैसी के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने तीखा पलटवार किया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने ओवैसी के बयान को गैर-गंभीर बताया। उन्होंने कहा, “ओवैसी को किसी न किसी चीज पर कुछ न कुछ कहना होता है। न तो लोग और न ही मीडिया उन्हें गंभीरता से ले रहे हैं। वह बहुत ही बेतुकी बातें करते रहते हैं। चाहे मीडिया हो या देश के नागरिक, अब उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।”
तेलंगाना बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने ओवैसी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, “ओवैसी आरएसएस के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। उनका कहना है कि ओवैसी ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया। यह गलत है। आरएसएस के कई सदस्यों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। हेडगेवार खुद इस आंदोलन का हिस्सा थे। वह कांग्रेस का हिस्सा थे क्योंकि उस समय कांग्रेस कोई राजनीतिक पार्टी नहीं थी। बाद में, यह एक राजनीतिक पार्टी बन गई। लेकिन आजादी की लड़ाई के दौरान, जब संघर्ष चल रहा था, तब कांग्रेस कोई राजनीतिक पार्टी नहीं थी।”
दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “सरसंघचालक मोहन भागवत ने बहुत बढ़िया बयान दिया है और उन्होंने ऐसा पहली बार नहीं कहा है। जब उन्होंने विज्ञान भवन में बातचीत की थी, तब भी उन्होंने ये बातें कही थीं और उन्होंने न्यूयॉर्क में भी इसे दोहराया है। एक बार नहीं, बल्कि कई बार उन्होंने आरएसएस की सोच के बारे में बताया है। लेकिन जो लोग हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार चाहते हैं, जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव चाहते हैं, जो हिंदू-मुस्लिम तनाव पर बयान देकर अपना काम चलाना चाहते हैं, उन्हें सरसंघचालक जी का बयान बहुत चुभता है। इसलिए, चाहे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मदनी साहब हों या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी साहब, उन्हें इस तरह के बयान देने की कोई जरूरत नहीं है।”
हैदराबाद में बीजेपी नेता टी. आर. श्रीनिवास ने भी ओवैसी को जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ओवैसी ने फिर से टिप्पणी की है, यह पूछते हुए कि हम दोहरी बातें क्यों कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आरएसएस ऐसा है या वैसा है। भारत का एक स्थिर वैचारिक रुख रहा है कि हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘विविधता में एकता’ में विश्वास करते हैं। हमने हर बार यही बात दोहराई है और कही है। हमारे प्रधानमंत्री ने भी इस बारे में बात की है।”
