नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने नई दिल्ली स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का दौरा कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता का जायजा लिया।
दौरे के दौरान उन्होंने गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की प्रभावी जांच, 12 आवश्यक लैब जांचों की उपलब्धता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को सराहा। उन्होंने लोगों तक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की भी प्रशंसा की।
स्वास्थ्य सचिव ने बच्चों के लिए बाल आभा आईडी बनाने के जरिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने साप्ताहिक योग और वेलनेस सत्र आयोजित करने तथा शहरी उप-स्वास्थ्य केंद्रों के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके जरिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल, शुरुआती जांच, आवश्यक डायग्नोस्टिक सेवाएं और वेलनेस सुविधाएं लोगों के घरों के करीब उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस दौरे ने समुदायों तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और मजबूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
वहीं, गुरुवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जम्मू-कश्मीर के अवंतिपोरा स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान -एम्स, अवंतिपोरा के निर्माण कार्य और संस्थान जल्द संचालित किए जाने की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, चिकित्सा उपकरणों और फर्नीचर की खरीद, संकाय सदस्यों तथा अन्य कर्मचारियों की भर्ती और संस्थान में चिकित्सा और शैक्षणिक गतिविधियां आरंभ किए जाने की तैयारियों का आकलन किया। समीक्षा के दौरान बताया गया कि एम्स अवंतिपोरा का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है और सभी प्रमुख भवन निर्मित कर लिए गए है।
जेपी नड्डा ने स्थल की दुर्गम भौगोलिक स्थितियों और अन्य बाधाओं के बावजूद परियोजना आगे बढ़ाने में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग तथा सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एम्स अवंतिपोरा को प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए संबंधित एजेंसियों को शेष निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए।
