नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन और भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत के लिए एनरोलमेंट पर रोक से जुड़े विवाद को पूरी तरह खत्म बताया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को भेजा गया पत्र जारी होने के करीब 30 मिनट के भीतर ही वापस ले लिया गया था और उस पर कभी अमल नहीं हुआ।
भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि पत्र को लेकर बार काउंसिल के सभी सदस्यों ने आधी रात को बैठक की और मामले पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद पत्र तत्काल वापस लेने का फैसला किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में कोई जांच नहीं होगी और पत्र की कोई वैधानिक या व्यावहारिक अहमियत नहीं है।
बीसीआई चेयरमैन ने कहा, “अगर किसी को भी, जिसमें सीजेपी भी शामिल हैं, कोई कन्फ्यूजन है, तो मैं आपके जरिए यह साफ करना चाहता हूं कि यह मामला पूरी तरह से खत्म और बंद हो चुका है। कोई जांच नहीं होगी।”
उन्होंने छात्रों के अधिकारों की रक्षा को बीसीआई की प्राथमिकता बताया। मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया का मकसद देश के युवाओं के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने अभिजीत दिपके और सौरव दास का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के हितों को लेकर बीसीआई और उनके उद्देश्य में कोई अंतर नहीं है।
मनन कुमार मिश्रा ने विरोध-प्रदर्शन और छात्रों के भविष्य को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसी भी विरोध के कारण छात्रों का भविष्य खतरे में डालने का सवाल ही नहीं उठता। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार के स्तर पर सीजेपी के लोगों के साथ बातचीत के बाद सभी एफआईआर वापस लेने का फैसला किया गया और अब कहीं भी कोई मामला लंबित नहीं है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को आम तौर पर निर्दोष माना जाता है और बीसीआई भी इसी दृष्टिकोण पर कायम है। मिश्रा ने दोहराया कि निर्दोष छात्रों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। मनन कुमार मिश्रा ने साफ किया कि वापस लिया गया पत्र लागू नहीं हुआ और छात्रों के खिलाफ किसी कार्रवाई या जांच का कोई सवाल नहीं है।

