Saturday, June 27, 2026
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बंगाल चुनाव: नंदीग्राम सीट पर फिर लहराया भगवा, सुवेंदु अधिकारी 9 हजार से ज्यादा वोटों से जीते

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कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट का चुनाव परिणाम सामने आ चुका है। यहां से भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी ने 9 हजार से ज्याादा वोटों के अंतर से टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को हराया है। ईसीआई के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी को 1,27,301 वोट मिले, वहीं पवित्र कर ने 1,17,636 वोट प्राप्त किए।

चुनावी नतीजों के साथ ही यह सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई है। नंदीग्राम सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की सियासत का केंद्र बिंदु है। यहां का जनादेश पूरे प्रदेश की दिशा तय करने की क्षमता रखता है। पिछले चुनाव में इसी सीट से तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यहां से हार का सामना करना पड़ा था।

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं, जब ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी से हुआ, जो तब भाजपा में शामिल हो चुके थे। बेहद कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी को 2 हजार से भी कम वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

इतिहास की बात करें तो यहां अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। शुरुआती दशकों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का दबदबा रहा, जिसने नौ बार जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि भाजपा ने 2021 में पहली बार जीत हासिल की।

पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम सीट लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सियासत का केंद्र रही है। तामलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट में नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 ब्लॉक शामिल हैं। 1967 में इसके वर्तमान स्वरूप में आने से पहले यह नंदीग्राम उत्तर और दक्षिण के रूप में दो अलग-अलग सीटें थीं।

नंदीग्राम का नाम 2007 के आंदोलन के साथ गहराई से जुड़ा है। वाम मोर्चा सरकार द्वारा प्रस्तावित केमिकल हब के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन में 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी। यह घटना राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हुई और यहीं से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का जनाधार तेजी से बढ़ा, जिसने 2011 में 34 साल पुरानी वाम सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।

डेमोग्राफिक रूप से यह एक प्रमुख रूप से ग्रामीण सीट है, जहां करीब 96.65 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते हैं। मुस्लिम मतदाता लगभग 23.60 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के मतदाता 16.46 प्रतिशत हैं। 2021 में यहां मतदान प्रतिशत 88.51 रहा, जो राज्य में सबसे अधिक में से एक था और इस सीट की राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।