नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पंजाब पर दिए गए बयान पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी है।
अरविंद केजरीवाल ने नशे के खिलाफ भाजपा की ओर से पंजाब में चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत पंजाब से नहीं, बल्कि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए।
पूर्व सीएम केजरीवाल ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नितिन नवीन की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, ”नशे के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत पंजाब से नहीं, मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए। अगर आपको पंजाब की रत्ती भर भी चिंता है तो गुजरात से आने वाले नशे को रोकिए।”
दरअसल, भाजपा पंजाब में नशे के खिलाफ ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकाल रही है। भाजपा की ओर से 18 सितंबर से शुरू की गई इस मुहिम के तहत चार अलग-अलग यात्राएं निकाली जा रही हैं, जो राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेंगी। इन यात्राओं का कुल प्रस्तावित सफर करीब 4,000 किलोमीटर बताया गया है और अभियान का समापन 30 सितंबर को जालंधर में प्रस्तावित है।
इसी अभियान के संदर्भ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत पंजाब की धरती से होनी चाहिए, क्योंकि पंजाब के युवा और पंजाब का भविष्य नशे के खतरे से प्रभावित हो रहे हैं। केजरीवाल ने इसी बात को आधार बनाकर भाजपा पर पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा को पंजाब के नशे की इतनी चिंता है तो गुजरात से आने वाले कथित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
हाल के दिनों में पंजाब सरकार की ओर से भी भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का मुद्दा उठाया गया है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मुंद्रा पोर्ट से बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए जाने का मुद्दा उठाते हुए भाजपा से इस संबंध में जवाब मांगा था। वहीं, भाजपा ने पंजाब में नशे की समस्या के लिए आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियों और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। नशे के खिलाफ अभियान को लेकर भाजपा द्वारा पंजाब में शुरू की गई यात्रा और आम आदमी पार्टी की ओर से मुंद्रा पोर्ट का मुद्दा उठाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
