नोएडा, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आज मां भगवती के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मां दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस, धर्म और न्याय का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने अपने पुत्री स्वरूप के माध्यम से पिता के कुल की रक्षा और परिवार के प्रति कर्तव्य निभाने का संदेश दिया है। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर माता से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी का संबंध महर्षि कात्यायन की तपस्या से जुड़ा हुआ है।
महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर तपस्या की और उनसे वरदान मांगा कि देवी पुत्री रूप में उनके कुल में जन्म लें। ऋषि की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उनकी इच्छा स्वीकार की और पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां के इस स्वरूप की कथा श्रद्धालुओं को भक्ति, तपस्या और समर्पण के महत्व का संदेश देती है।
मां कात्यायनी की कथा में पुत्री के रूप में पिता के कुल से जुड़ाव को विशेष महत्व दिया गया है। सामान्य सामाजिक परंपरा में विवाह के बाद पुत्री का गोत्र पति के गोत्र से जुड़ जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी कात्यायनी सदैव अपने पिता के गोत्र से जुड़ी रहीं। यह प्रसंग पुत्री के अपने परिवार के प्रति स्नेह, जिम्मेदारी और सम्मान को दर्शाता है।
मां का यह स्वरूप समाज को संदेश देता है कि बेटियां भी अपने परिवार की प्रतिष्ठा, परंपराओं और संस्कारों की संवाहक होती हैं। परिवार और समाज के निर्माण में बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र की छठी तिथि पर मां कात्यायनी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है।
इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित किया जाता है। इसके बाद फूल, अक्षत, रोली, धूप और नैवेद्य अर्पित कर मां की आराधना की जाती है। श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते हैं। रात में जागरण और जप करने की भी धार्मिक परंपरा है।
मान्यता है कि सच्चे मन से मां की उपासना करने वाले साधकों को माता की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। धार्मिक परंपरा में नवरात्र की छठी तिथि को मां सरस्वती से भी जोड़कर देखा जाता है। इस अवसर पर ज्ञान, विद्या, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति के लिए देवी की आराधना की जाती है। विद्यार्थी विशेष रूप से मां से पढ़ाई में एकाग्रता, सफलता और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मांगते हैं।
मां कात्यायनी की पूजा जहां शक्ति और साहस का प्रतीक है, वहीं मां सरस्वती की उपासना ज्ञान और विवेक के महत्व को रेखांकित करती है। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के दौरान देवी स्तुति का पाठ किया जाता है। “या देवी सर्वभूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इस मंत्र के माध्यम से देवी के उस स्वरूप को नमन किया जाता है, जो समस्त प्राणियों में स्मृति के रूप में विद्यमान हैं। श्रद्धालु मंत्र जाप कर माता से सद्बुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मांगते हैं। नवरात्र का प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित है और हर स्वरूप अपने भीतर एक विशेष संदेश समेटे हुए है। मां कात्यायनी की पूजा का अवसर भक्तों को शक्ति, साहस, भक्ति और पारिवारिक मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। इस दिन श्रद्धालु माता की आराधना कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करेंगे।
–आईएएनएस
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