नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। हरियाणा के फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप में भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केरल से आई महिला विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हिंदी के इस्तेमाल और अनुवाद की सुविधा न होने के विरोध में वर्कशॉप से वॉकआउट कर दिया था।
इस घटना पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि एनसीडब्ल्यू वर्कशॉप में केरल की महिला विधायकों के साथ किया गया व्यवहार बेहद निंदनीय है।
सीएम सतीशन ने लिखा, “राष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों को डराना हमारे संवैधानिक समझौते की जड़ पर हमला है। हमारे संस्थापकों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जिसकी ताकत एकरूपता से नहीं, बल्कि विविधता की एकता से आएगी। एक ऐसा संघ जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पहचान राष्ट्रीय ताने-बाने को कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध करती हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत विविध भाषाई परंपराओं का संघ है, न कि एक एकल इकाई। आपसी सम्मान, समायोजन और संवैधानिक समानता, न कि भाषाई थोपना, हमारे राष्ट्रीय मंचों को परिभाषित करना चाहिए। हमारी विविधता भारतीय एकता के लिए चुनौती नहीं है बल्कि यही इसकी नींव है।
इससे पहले 8 सितंबर को कांग्रेस ने भी एनसीडब्ल्यू को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने केरल सरकार के मंत्री बिंदु कृष्णा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि हमें 73वें और 74वें संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में आरक्षण मिला। अब हम राज्य विधानसभाओं और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। कानून पास हो चुका है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ है। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या हस्तक्षेप किया है?
कांग्रेस ने कहा था कि राष्ट्रीय महिला आयोग भाजपा का प्रॉक्सी नहीं है। इसे पूरे भारत में महिलाओं के उत्थान के लिए खड़ा होना चाहिए। बिंदु कृष्णा केरल सरकार में महिला एवं बाल विकास, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री हैं।
