नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का युद्धपोत एचएनएलएमएस डी रूयटर (एफ804) भारत पहुंचा है। नीदरलैंड्स का यह युद्धपोत डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का अत्याधुनिक फ्रिगेट है। इस युद्धपोत ने भारत के कोच्चि स्थित समुद्र तट पर प्रवेश किया है। इस जहाज के आगमन के साथ ही रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल (रॉयल मरीन्स) रॉब डी विट भी कोच्चि का दौरा कर रहे हैं।
दरअसल यहां नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि का दौरा कर रहा है। कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचने पर भारतीय नौसेना के फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट द्वारा नीदरलैंड्स नौसेना के युद्धपोत को एस्कॉर्ट किया गया। इस मौके पर भारतीय नौसैनिक बैंड के साथ नीदरलैंड्स के अधिकारियों व युद्धपोत का औपचारिक स्वागत किया गया।
गौरतलब है कि नीदरलैंड्स का यह युद्धपोत वर्तमान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पांच महीने की लंबी तैनाती पर है। यहां यह युद्धपोत विभिन्न साझेदार देशों के साथ कई समुद्री अभ्यासों में शामिल होगा। रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का यह दौरा और प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति काफी महत्वपूर्ण है। भारत और नीदरलैंड्स के बीच मजबूत होते समुद्री संबंधों के दृष्टिकोण से इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले उप कमांडर रॉब डी विट फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन-26 के लिए भारत आए थे। तब वह इंडियन ओशन नेवल संगोष्ठी प्रमुखों के सम्मेलन में शामिल हुए थे। नौसेना के मुताबिक नीदरलैंड्स के इस प्रतिनिधिमंडल ने भारत की दक्षिणी नौसैनिक कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान समुद्री क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने, प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करने और साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय स्मरण दिवस (4 मई) पर मेजर जनरल रॉब डी विट और राजदूत मारिसा गेरार्ड्स ने दक्षिणी नौसैनिक कमान के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। पुष्पांजलि के माध्यम से उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह एक भावपूर्ण और सम्मानजनक क्षण रहा। नौसेना के अनुसार प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में कई द्विपक्षीय गतिविधियां शामिल हैं। इनका उद्देश्य प्रशिक्षण सहयोग को मजबूत करना और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना है।
नीदरलैंड्स का यह प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी नौसैनिक कमान के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा भी करेगा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य यहां आधुनिक सिमुलेटर तथा अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का अवलोकन करेंगे। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का भी दौरा करेगा। शिपयार्ड में वे भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को समझेंगे और औद्योगिक सहयोग के नए अवसरों की तलाश करेंगे।
दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पेशेवर और सामाजिक स्तर पर भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कोच्चि से प्रस्थान के बाद युद्धपोत ‘एचएनएलएमएस डी रूयटर’ भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ पैसेज एक्सरसाइज में भाग लेगा। नौसेना का मानना है कि इस नौसैनिक अभ्यास से दोनों देशों के बीच सामरिक समन्वय और परिचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
–आईएएनएस
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