Friday, July 24, 2026
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पेपर लीक मामले पर टीका राम जूली का केंद्र पर हमला, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग

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जयपुर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने दिल्‍ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा न देने पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने नए शिक्षा सचिव को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता टीका राम जूली ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान जंतर-मंतर पर पुलिस के इंटरनेट बंद करने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्‍होंने कहा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और जब तक ऐसा नहीं होता, हम अपनी मांग जारी रखेंगे। पाकिस्तानी अकाउंट या पाकिस्तानी एजेंटों के आरोपों की बात करें तो, जब भी भाजपा किसी संकट में होती है तो ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन बाद में वे गायब हो जाते हैं।

उन्‍होंने सवाल उठाया कि अगर पाकिस्तानी अकाउंट चल रहे थे, तो हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियां ​​क्या कर रही थीं? सिर्फ इंटरनेट बंद करने से समस्या हल नहीं होगी। एक मामले में एक छात्र के ओएमआर शीट पर नंबर बदल दिए गए थे और जब छात्र ने कहा कि आंसर शीट उसकी नहीं है, तो उस पर पाकिस्तान से जुड़े होने का आरोप लगा दिया गया।”

टीका राम जूली ने कहा, “जब से नीट पेपर लीक का मामला सामने आया है, कांग्रेस जिला, ब्लॉक और राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है और हम ऐसा करना जारी रखेंगे। राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरा इंडी गठबंधन लोकसभा में इस मुद्दे पर एकजुट रहा है। उन्होंने आत्महत्या करने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि भी दी। राहुल गांधी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं और कहा है कि वे उनकी आवाज बनेंगे और उनके अधिकारों के लिए लड़ेंगे, चाहे नतीजे कुछ भी हों। वे हर स्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे।”

कांग्रेस नेता ने शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार के बारे में कहा, “जब वे कृषि विभाग में थे, तब उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने अपने ही परिवार को सब्सिडी दी और खुद भी उसका फायदा उठाया। जब ऐसे आरोप हों तो सरकार कैसे उम्मीद कर सकती है कि लोग यह मानेंगे कि वह उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने को लेकर गंभीर है? न तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगा गया और न ही उच्च शिक्षा सचिव को सजा दी गई, उन्हें बस दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया। कार्रवाई सिर्फ छात्रों के खिलाफ हुई। उन्हें लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा और छात्राओं के साथ बुरा बर्ताव किया गया।”

उन्‍होंने कहा, “छात्र लगभग एक महीने से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सोनम वांगचुक भी लगभग एक महीने से भूख हड़ताल पर थे। यह अच्छी बात है कि सरकार से बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्‍म कर दिया, लेकिन सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लगभग 20 दिनों तक कोई उनसे मिलने नहीं गया और जिस तरह से उन्हें वहां से ले जाया गया, वह बहुत दुखद था। छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस का इस्तेमाल और छात्राओं के साथ कथित बुरा बर्ताव बहुत निंदनीय था।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि हकीकत यह है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सभी कार्रवाई लोगों को गुमराह करने के लिए की जा रही हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्‍तीफा क्‍यों नहीं लिया जा रहा है। सरकार अगर शिक्षा के लिए मजबूत बिल लेकर आती है तो इस तरह के काम को पहले ही कर लेना था।