नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास रणनीति पर सेना विशेषज्ञों का बड़ा सम्मेलन 19 मई को

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नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस) नई दिल्ली में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें यह मंथन किया जाएगा कि बदलते वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत कैसे सैन्य, कूटनीतिक, आर्थिक व तकनीकी क्षमताओं से रणनीतिक शक्ति को बेहतर बना सकता है। सेमिनार में स्वयं भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य शामिल होंगे।

सेना के मुताबिक नई दिल्ली में 19 मई को सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज की ओर से यह महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया जाएगा। ‘सुरक्षा से समृद्धि : सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर’ विषय पर होने वाला यह सेमिनार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक रणनीति और तकनीकी नवाचार के बीच तालमेल को लेकर व्यापक चर्चा का मंच बनेगा।

गौरतलब है कि सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज, भारतीय सेना का एक स्वायत्त रणनीतिक थिंक टैंक है। यह जमीनी युद्ध, रणनीतिक मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वैचारिक पहलुओं पर शोध करता है। इस उच्चस्तरीय सेमिनार में नीति निर्माता, राजनयिक, रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और रणनीतिक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत किस प्रकार सैन्य, कूटनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को एकीकृत कर अपनी रणनीतिक शक्ति को और मजबूत कर सकता है। सेमिनार में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यक्रम के दौरान ‘स्मार्ट पावर’ की अवधारणा पर विशेष रूप से चर्चा होगी। इसके अंतर्गत यह विचार किया जाएगा कि केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, तकनीकी आत्मनिर्भरता, प्रभावी कूटनीति और राष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमता को एक साथ जोड़कर भारत किस प्रकार दीर्घकालिक विकास और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सुरक्षा और समृद्धि एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुके हैं। वैश्विक संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, साइबर खतरे, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों के बीच किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी सुरक्षा संरचना पर निर्भर करती है। ऐसे में भारत के लिए ‘स्मार्ट पावर’ की नीति भविष्य की रणनीतिक आवश्यकता बनकर उभर रही है।

सेमिनार में रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता, नई तकनीकों का उपयोग, आर्थिक सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका जैसे विषयों पर भी मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी चर्चा होगी कि भारत कैसे अपनी उभरती वैश्विक भूमिका को मजबूत करते हुए सतत विकास और राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकता है।

इस आयोजन से नीति निर्माण और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है। ये वे सुझाव होंगे जो आने वाले वर्षों में भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूती देने में सहायक हो सकते हैं।