नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका कम करने और छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए संसदीय समिति ने कई अहम सिफारिशें की हैं। समिति ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
इसके लिए देशभर में सरकारी परीक्षा केंद्र बनाने, हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने और छात्रों को अभ्यास परीक्षा का अवसर देने पर जोर दिया गया है। राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्टूबर को राज्यसभा के सभापति को अपनी 382वीं रिपोर्ट सौंपी। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधार और उसे मजबूत बनाने के लिए कई सिफारिशें की गई हैं।
समिति ने कहा कि एजेंसी हर साल लगभग 1.2 करोड़ छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करती है। ऐसे में उसकी जिम्मेदारियों के अनुरूप संसाधन, विशेषज्ञ कर्मचारी और जवाबदेही की व्यवस्था जरूरी है। समिति ने सुझाव दिया कि नीट-यूजी सहित प्रमुख परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए बड़ा और लगातार अद्यतन होने वाला प्रश्न बैंक बनाया जाए।
प्रश्नपत्र परीक्षा के काफी करीब तैयार किए जाएं, ताकि उन्हें पहले से जानने या लीक होने का खतरा कम हो। प्रश्न बैंक तैयार करने और प्रश्नों का अनुवाद करने के लिए आईआईटी, एम्स और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद ली जाए।
विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले उनकी विश्वसनीयता और हितों के टकराव की भी जांच हो। समिति ने कहा कि नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने से पहले पर्याप्त सरकारी बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की 1,000 सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश को समयबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव दिया गया है।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी केंद्र बनाए जाएं। स्कूलों और कॉलेजों में 100 से 200 कंप्यूटर वाले प्रयोगशाला केंद्र स्थापित करने के लिए एजेंसी आर्थिक सहायता दे सकती है। इन केंद्रों का उपयोग परीक्षाओं के लिए किया जा सकेगा। समिति ने स्पष्ट किया कि परीक्षा केंद्रों का संचालन केंद्र या राज्य सरकारों के पास होना चाहिए।
निजी संस्थानों को उप-ठेके पर परीक्षा केंद्र चलाने देने से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। जहां कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा पर्याप्त नहीं है, वहां अस्थायी रूप से ऐसी व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें प्रश्नपत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर भेजकर वहीं प्रिंट किए जा सकें। कंप्यूटर आधारित परीक्षा में अलग-अलग प्रश्नपत्रों के कारण अंकों के सामान्यीकरण की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच वाली व्यवस्था भी पहले से तय होनी चाहिए। परीक्षा व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी दूर करने पर भी जोर दिया गया है। समिति के अनुसार, एजेंसी में स्वीकृत 39 पदों में से केवल 23 पर अधिकारी तैनात हैं। यानी करीब 41 प्रतिशत पद खाली हैं।
समिति ने स्थायी विशेषज्ञ कर्मचारियों की भर्ती करने और परीक्षा सुरक्षा, आंकड़ा विश्लेषण, डिजिटल व्यवस्था तथा परीक्षा संचालन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने की सिफारिश की है। समिति ने सुझाव दिया कि एनटीए परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों का सार्वजनिक अभिलेख तैयार करे। प्रश्नपत्र लीक या अन्य गड़बड़ियों से संबंधित प्राथमिकी, जांच और अभियोजन की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, परीक्षा से जुड़ी सेवाएं देने वाली प्रतिबंधित कंपनियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की राष्ट्रीय सूची बनाई जाए। यह सूची सार्वजनिक हो और सरकारी परीक्षा संस्थाएं ऐसी कंपनियों को ठेका न दें।
छात्रों को राहत देने के लिए समिति ने परीक्षा के दौरान हस्ताक्षर और जांच जैसी औपचारिकताओं के लिए अलग से 15 मिनट रखने का सुझाव दिया है। कुछ मिनट देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को लिखित घोषणा लेकर परीक्षा में बैठने देने की व्यवस्था पर भी विचार करने को कहा गया है। हालांकि, उन्हें अतिरिक्त समय नहीं दिया जाना चाहिए। परीक्षा के दिन रैलियों और जुलूसों से छात्रों को होने वाली परेशानी रोकने के लिए जिला प्रशासन को पहले से यातायात और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की सिफारिश भी की गई है।
समिति ने नीट-यूजी में दो चरणों वाली परीक्षा की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है। इसके तहत सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए प्रारंभिक परीक्षा और अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए विशेष मुख्य परीक्षा हो सकती है। इसके अलावा, परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों की संख्या को उपलब्ध सीटों के अनुरूप रखने, कोचिंग संस्थानों के लिए नियामक व्यवस्था बनाने और प्रश्नपत्रों को निर्धारित स्कूली पाठ्यक्रम पर आधारित रखने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, निशुल्क परामर्श, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुलभ परीक्षा केंद्र और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। समिति ने एजेंसी के भीतर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम बनाने, परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द होने पर प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है।
