नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। सोशल मीडिया पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नाम से एक कथित वीडियो तेजी से प्रसारित किया जा रहा है। इस फर्जी वीडियो में उनके हवाले से यह दावा किया गया है कि भारत-अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और आईएसकेपी का समर्थन करेगा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य इलाकों को निशाना बनाते हुए यह बात कही।
भारतीय सेना ने आधिकारिक जानकारी देते हुए इस दावे को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया है। सेना के अनुसार, प्रसारित वीडियो में जनरल धीरज सेठ के एक वास्तविक भाषण के दृश्य का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उसकी आवाज और कथित बयान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से बदल दिया गया है। यानी वास्तविक वीडियो को आधार बनाकर उसमें मनगढ़ंत बातें जोड़ दी गईं। इसके बाद उस फर्जी वीडियो को इस तरह प्रसारित किया गया, मानो ये बातें सेना प्रमुख ने स्वयं कही हों।
स्वतंत्र फैक्ट-चेक में भी इस तरह के फर्जी वीडियो की पुष्टि हुई है। गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में जनरल धीरज सेठ के नाम से एक अन्य एआई-निर्मित वीडियो सामने आया था। जांच में वास्तविक भाषण और वायरल वीडियो के बीच अंतर पाया गया तथा एआई जांच उपकरणों ने भी वीडियो और आवाज में हेरफेर के स्पष्ट संकेत दिए थे।
मंगलवार को सामने आए इस मामले में भारतीय सेना ने लोगों से ऐसे वीडियो को बिना सत्यापन साझा नहीं करने की अपील की है। सरकार की ओर से भी लगातार चेताया जाता रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो वास्तविक व्यक्तियों की आवाज और चेहरे की नकल करके झूठी बातें फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। भारतीय सेना से जुड़े फैक्ट-चेक सिस्टम ने भी ऐसे मामलों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई और लोगों से पहले सत्यापन करने फिर प्रसार करने की अपील पर जोर दिया है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान आधारित कई सोशल मीडिया एकाउंट्स जैसे क्वांटम पल्स, टैक्टिकल ट्रिब्यून, इंशाल सिद्दीकी और जरयाब अली720 आदि नियमित रूप से भारत और भारतीय सशस्त्र बलों को बदनाम करने के लिए मनगढ़ंत वीडियो शेयर करते हैं। मौजूदा मामले में भी साफ दिखाई देता है कि असली वीडियो के दृश्य, बनावटी आवाज, गढ़े हुए बयान और भ्रामक संदर्भ को मिलाकर एक नया कथानक तैयार किया गया। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो को देखने के बाद उसे तुरंत सच मानने या आगे बढ़ाने के बजाय उसके मूल स्रोत और आधिकारिक पुष्टि की जांच करना जरूरी है।
