Friday, July 24, 2026
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पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले का बिहार में स्वागत, विपक्ष बोला-सिर्फ आश्वासन से नहीं चलेगा काम

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पटना, 24 जुलाई (आईएएनएस)। पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनवाने के फैसले और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल खत्म करने को लेकर पीएम मोदी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए वीडियो को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

बिहार सरकार के मंत्रियों और एनडीए नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश और सरकार की पहल का स्वागत करते हुए छात्रों से आंदोलन खत्म कर पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान ने कहा कि सरकार ने छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसात्मक तरीके से आंदोलन करना उचित नहीं है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर गलत कदम न उठाएं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया है। छात्रों की आवाज को दबाने की सरकार की कोई मंशा नहीं है, लेकिन विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार छात्रों और युवाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सरकार ने छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश इसी दिशा में एक प्रयास है ताकि छात्रों को भरोसा दिया जा सके। सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार है और समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से करना चाहती है। विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंनेकहा कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों के साथ-साथ उनके परिवार भी प्रभावित होते हैं। केंद्र और राज्य सरकार छात्रों के साथ खड़ी है, लेकिन छात्रों को किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालना ही सही रास्ता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने भविष्य पर ध्यान दें और विकसित बिहार व मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दें।

जेडीयू विधायक विनय चौधरी ने कहा कि विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग कर रहा था और अब जब प्रधानमंत्री ने छात्रों से बात कर कार्रवाई का भरोसा दिया है, तब भी विरोध जारी है। सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने पर उन्होंने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार बातचीत और समाधान में विश्वास करती है।

जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस भावना के साथ छात्रों को संबोधित किया है, उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है और फास्ट ट्रैक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है।

चेतन आनंद ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। छात्रों और आम जनता के हित में जो भी जरूरी कदम होंगे, सरकार उन्हें उठाने का प्रयास कर रही है।

वहीं बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और सदन में जनता की समस्याओं को उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। अगर विपक्ष के नेता ही सदन में मौजूद नहीं रहेंगे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत कैसे होगी।

वहीं, सीपीआई (एमएल) विधायक संदीप सौरव ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से बकवास है। पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। जो लोग पकड़े जाते हैं, वे जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाते हैं। उन्होंने बिहार के संजीव मुखिया का उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक मामले में आरोपी होने के बावजूद जमानत मिल गई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के सामने सही जानकारी रखनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि असली मुद्दा यह है कि क्या देश के शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे या नहीं, इस पर प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस घटना पर दुख तक व्यक्त नहीं किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता को समझा जा सकता है।

सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने को लेकर संदीप सौरव ने कहा कि यह आंदोलन कभी भी सिर्फ सोनम वांगचुक तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक इस आंदोलन का एक चेहरा जरूर थे, लेकिन देश के युवा किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि अपने मुद्दों और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।