नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सुवेंदु सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीनों में अभिषेक बनर्जी पर 7 बार जानलेवा हमला हुआ है, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। कीर्ति आजाद ने कहा कि राज्य में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद दोषियों को पकड़ा नहीं जा रहा।
पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, “पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति ऐसी है। यह संभवतः किसी देश में भी ऐसी नहीं देखी गई होगी। हमारे मुख्य सचिव अभिषेक बनर्जी, जो टीएमसी के नेता हैं और लोकसभा में भी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके ऊपर पिछले 6 महीनों में 7 बार जानलेवा हमला हुआ है।”
उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को भी एक चिट्ठी लिखी है और उसमें बताया है कि किस प्रकार पश्चिम बंगाल में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में वहां की पुलिस अनदेखी कर रही है। सीसीटीवी फुटेज हर एक ऐसी घटना के लिए उपलब्ध हैं।
कीर्ति आजाद ने कहा कि आज अभिषेक बनर्जी का जन्मदिन भी है और सुबह दो बजे सीसीटीवी कैमरे में साफ दिखाई दिया कि पहले आधे-पौने घंटे तक लोग आकर पत्थर मारते रहे। डंडे लेकर घूमते रहे, तोड़फोड़ का प्रयास करते रहे। सामने लोगों की छोटी-मोटी दुकानों को भी तोड़कर नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस आई भी तो किसी को पकड़ा नहीं। एक-एक करके लोगों को अपने साथ ले जाती रही, जैसे वे उनके साथी हों।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति मैंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी नहीं देखी। यहां तक कि अंग्रेज भी इस प्रकार की बर्बरता नहीं करते थे। सारे सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पोस्ट-पोल वायलेंस नहीं होना चाहिए, लेकिन फिर भी हो रहा है। मेरे दफ्तर को दो बार तोड़ दिया गया। वहां से सरकारी सामान चोरी करके ले गए। उसके बाद केवल दो लाइनों की शिकायत दर्ज कर दी गई। सीसीटीवी की जो हार्ड ड्राइव मेरे पास थी, वह भी ले गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
टीएमसी सांसद ने कहा कि दो महीने पहले के आंकड़े बता रहा हूं, लगभग 600 बलात्कार के मामले और 1200 मर्डर हुए थे, अब तो संख्या और बढ़ गई होगी। ऐसा लगता है मानो पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था है ही नहीं और यह एक आम बात हो गई है।
उन्होंने कहा, “मैंने अभिषेक बनर्जी की बात सुनी और उसमें काफी सच्चाई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई संज्ञान नहीं लिया, हाईकोर्ट ने भी कोई प्रभावी संज्ञान नहीं लिया। पुलिस देखती नहीं, सरकार सुनती नहीं। विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस के लगभग 14,000 कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है। हमारे कार्यकर्ता कहां जाएं, किससे बात करें, कुछ समझ नहीं आता।”
सांसद ने कहा कि इसलिए मैं चाहता हूं कि इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। ऐसे हादसे नहीं होने चाहिए। मैं भाजपा के सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि राजनीतिक लड़ाई अलग होती है, लेकिन व्यक्तिगत लड़ाई ठीक नहीं है, क्योंकि अगर पासा पलटता है तो यह आपके साथ भी हो सकता है। पहले कहा जाता था कि जब तृणमूल की सरकार थी तब यह हो रहा था, वह हो रहा था। अब क्या हो रहा है, यह सबके सामने है।
पुलिस की कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि पुलिस का कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। मैं आपको अपनी व्यथा बताता हूं। मैंने तीन सप्ताह पहले शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने उसका संज्ञान नहीं लिया। बहुत बाद में भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। आप ही बताइए, जब पहली बार अभिषेक बनर्जी जी डायमंड हार्बर गए थे और सबने देखा था कि उनके माथे पर इतनी बड़ी चोट लगी थी। उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, इसलिए जान बच गई। क्या हुआ उसके बाद? क्या किसी पर कार्रवाई हुई? क्या हत्या की कोशिश की धारा लगाई गई? कुछ भी नहीं।
उन्होंने कहा कि वहां कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। संविधान का भी कोई सम्मान नहीं है। हम शिकायत करते हैं तो पहले शिकायत ली नहीं जाती। अगर ली भी जाती है तो उसे एफआईआर में परिवर्तित नहीं किया जाता और न ही उसकी जांच की जाती है। ये तो राम भरोसे भी नहीं चल रहा है। जिन लोगों ने राम मंदिर में डकैती डाल दी, वे रामराज्य की बात करते हैं। यह हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और जैसी स्थिति है। यही भारतीय जनता पार्टी की हकीकत है।
