पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोटिंग से लोकतंत्र मजबूत, आठवले ने सुरक्षा व्यवस्था को बताया अहम कारण

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मुंबई, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। देश की आजादी के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में ऐतिहासिक हाई वोटर टर्नआउट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इस बीच केंद्रीय राज्यमंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने शुक्रवार को इस पर प्रतिक्रिया दी।

आठवले ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जिस तरह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आजादी के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है, उसका मतलब है कि हमारा लोकतंत्र मजबूत हुआ है। पश्चिम बंगाल में 91 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग होने का कारण है कि इस बार गुंडागर्दी करने का मौका किसी को मिला नहीं है। ममता दीदी के गुंडों को बाहर आने का मौका नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, “केंद्रीय सुरक्षाबलों ने बंगाल के लोगों को पूरी सुरक्षा दी, जिसके कारण अनेक लोगों ने वोटिंग किया। आजादी के बाद पहली बार इतनी वोटिंग हुई है। मैंने लोकसभा में कई बार मांग की है कि वोटिंग को अनिवार्य करना चाहिए। जो 8-9 प्रतिशत लोग रह गए हैं, उन्हें भी वोटिंग करनी चाहिए। वोटिंग को अनिवार्य करने पर कानून बनना चाहिए। मैं पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की जनता का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने पूरी ताकत से वोटिंग की है। आजादी के बाद दोनों जगह ऐतिहासिक रूप से वोटिंग सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। पश्चिम बंगाल में एनडीए की सरकार बनने वाली है। मुझे विश्वास है कि तमिलनाडु में भी अधिक वोटिंग का फायदा एनडीए को होगा।”

आठवले ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का समर्थन किया और कहा, “उन्होंने साफ किया है कि गुंडागर्दी बंद करनी चाहिए। अब पश्चिम बंगाल में ममता का राज नहीं, बल्कि एनडीए का रहेगा। उन्होंने यही कहा है कि अब तक कुछ लोगों ने गुंडागर्दी की है, लेकिन अब हमारी सरकार आ रही है, जिसमें गुंडागर्दी को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी किए जाने को सही ठहराया और कहा, “खड़गे ऐसी बयानबाजी हमेशा करते रहते हैं। वह हमारे दलित समाज से आते हैं और पार्टी ने अध्यक्ष बनाया, जो अच्छी बात है। लेकिन, प्रधानमंत्री के बारे में वह कई बार इसी तरह की भाषा का प्रयोग करते रहते हैं। प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहना, कितना सही है, अब यह लोग सोचेंगे।”

महाराष्ट्र में मराठी भाषा न आने पर ड्राइवर को लाइसेंस नहीं मिलने वाले विवाद पर आठवले ने कहा, “प्रताप सरनाइक परिवहन मंत्री हैं। उन्होंने ऐसा निर्णय लिया है कि मुंबई में जो टैक्सी और ऑटो रिक्शा ड्राइवर हैं, उन्हें मराठी बोलनी चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया है कि हर ड्राइवर को मराठी के क्लास दिए जाएंगे। हालांकि, लाइसेंस रद्द करने की भूमिका से हम सहमत नहीं हैं। गरीब लोगों का लाइसेंस रद्द करना अन्याय होगा। जिसको मराठी नहीं आती है, वह इसको सीखता रहेगा, लेकिन किसी का भी लाइसेंस रद्द नहीं होना चाहिए।”