नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अंकुर नरूला के खिलाफ कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की है। अंकुर नरूला पर चंगाई सभाओं में चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने का आरोप है।
पास्टर अंकुर नरूला पर विदेशी मिशनरी को पर्यटक वीजा पर भारत बुलाकर धार्मिक गतिविधियां करवाने के आरोप हैं। इसे विदेशी अधिनियम 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके साथ ही, आरोप है कि नरूला की संस्था ने बिना एफसीआरए विदेशी चंदा प्राप्त किया।
इसके इलावा, अभिषेक तेल और घड़ियों की बिक्री बिना जीएसटी बिलों के करने का आरोप है। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं को देखते हुए ईडी ने मामले की जांच शुरू की थी। फिलहाल, जांच एजेंसी ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट दाखिल की है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में जांच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जांच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिया है। अदालत का यह भी निर्देश है कि इस स्टेज पर कोई भी पक्ष मीडिया को केस की जानकारी नहीं देगा। इस मामले में 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई होनी है।
नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर खाम्बरा गांव में पेंटेकोस्टल चर्च के तहत ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ नाम का चर्च चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का बिजनेस छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने का फैसला किया। नरूला ने 2008 में खाम्बरा गांव में ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ की स्थापना की थी।
