कोलकाता, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल के पास हुई भगदड़ को लेकर एक प्रत्यक्षदर्शी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पंडाल के पास रहने वाले प्रेम गुप्ता ने इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से बताया कि आखिर कैसे यह हादसा हुआ और इसके पीछे क्या कारण रहे।
प्रेम गुप्ता ने बताया, “मुझे खबर मिली कि यहां भगदड़ मच गई है। मैंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कई लोगों को वीआईपी कार्ड दिए थे, इसलिए वे सभी पंडाल तक पहुंच गए थे। उन्होंने मुझे बताया कि वहां लगातार घोषणा की जा रही थी कि सभी लोग पंडाल से बाहर निकल जाएं लेकिन तब तक अंदर घटना घटनी शुरू हो चुकी थी।”
उन्होंने बताया, “उस समय बारिश भी हो रही थी। बारिश से बचने के लिए बाहर खड़ी भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा हो गई थी। सभी लोग सज-संवरकर आए थे, किसी का मेकअप खराब न हो और किसी के कपड़े न भीगें, इसका ध्यान रख रहे थे। किसी को इस बात से कोई मतलब नहीं था कि अंदर किसी को तकलीफ हो रही है। बस खुद को बचाने के लिए सभी पंडाल के अंदर घुसने लगे।”
उन्होंने बताया कि पंडाल के अंदर पहले से ही काफी भीड़ मौजूद थी। बाहर से और लोग जबरदस्ती अंदर घुस गए। अंदर मौजूद लोग बाहर निकलना चाहते थे लेकिन उन्हें बाहर आने का मौका ही नहीं मिला। अंदर और बाहर की भीड़ के टकराव से ही भगदड़ मच गई और यह दुखद हादसा हो गया।
प्रेम गुप्ता ने कहा कि पंडाल का प्रबंधन पूरी तरह से तत्पर था लेकिन यह समस्या पिछले तीन दिनों से चल रही थी। उन्होंने इस घटना के लिए जनता की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “पब्लिक का भी बहुत बड़ा दोष है। जब आप इतनी बड़ी पूजा देखने आ रहे हैं और जानते हैं कि वहां भारी भीड़ है, तो आपको थोड़ा संयम दिखाना चाहिए। लोग बच्चों को, अपनी पत्नी को और अपनी मां को लेकर आ जाते हैं। इतनी भीड़ में उन्हें इस तरह नहीं आना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि लोग वहां हल्ला मचा रहे थे, पुलिस के बैरिकेड को हटा रहे थे और रस्सियों को तोड़कर धक्का-मुक्की कर रहे थे। कई लोग तो जबरदस्ती अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। कोई भी नियम मानने को तैयार नहीं था।
प्रेम गुप्ता ने कहा, “हम लोग यहीं रहते हैं, इसलिए हम पूजा घूमने नहीं निकलते। हम खुद लोगों से कहते हैं कि भैया आराम से जाइए, आपको आगे जाने का मौका नहीं मिलेगा। डेढ़-दो सौ लोग जब तक बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक आप अंदर नहीं जा सकते, लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं था।”
उन्होंने कहा, “प्रशासन अगर तत्पर रहता तो यह घटना नहीं घटती। वैसे तो हादसा कभी भी हो सकता है लेकिन अगर प्रशासन सतर्क रहता तो इसे रोका जा सकता था। सभी लोग अपनी नौकरी और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे। किसी ने ध्यान नहीं दिया।”
प्रेम गुप्ता ने बताया कि उन्हें इस तरह के हादसे की आशंका पहले से ही थी। उन्होंने कहा, “मुझे परसों ही आशंका हो गई थी। मैंने पूजा कमेटी के सभी लोगों से कहा था कि आप लोग मिलकर बैठक करो। प्रशासन को बुलाओ, लोकल लड़कों और वालंटियर्स को बुलाओ और सब मिलकर चर्चा करो कि इस भीड़ को कैसे संभालना है।”
वहीं, दुर्गा पूजा के दौरान मची भगदड़ में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिजन ने बताया, “वहां मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने हमें अपने फोन से कॉल किया। हम चाहते हैं कि पूजा का आयोजन करने वाली समिति के सदस्यों को गिरफ्तार किया जाए। वहां जाकर करीब से देखने पर मैंने देखा कि शव को ढंकने वाली चादर हटी हुई थी और मैंने अपने बड़े भाई को उनके पैरों से पहचाना। इस घटना के लिए पूजा समिति को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री बयान दे रहे हैं लेकिन अगर स्थिति को और अधिक सावधानी से संभाला जाता और कड़े कदम उठाए गए होते, तो शायद ऐसा न हुआ होता।”
