नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माने जाने वाला पितृपक्ष इसी महीने में 26 सितंबर से शुरू होगा। 16 दिन तक चलने वाले पितृपक्ष में हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। ऐसे में हर साल लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि पितृपक्ष के दौरान नए कपड़े या अन्य चीजें खरीदनी चाहिए या नहीं?
शास्त्रों के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान नया सामान या नए कपड़े खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन इस दौरान गहने, नए वस्त्र, गाड़ी, मकान-जमीन और लोहे का सामान जैसी बड़ी चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि नई चीजें हमारे भीतर दिखावे की भावना ला सकती हैं, इसलिए इनसे बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजें खरीदने में कोई बुराई नहीं है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों का आयोजन वर्जित माना जाता है। इस निषेध का मुख्य कारण यह है कि यह अवधि पूरी तरह से पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित होती है। पितृपक्ष की प्रकृति अत्यंत गंभीर और संयमित होती है, जबकि मांगलिक कार्यों में उत्सव और उल्लास का माहौल रहता है। माना जाता है कि ऐसे आयोजनों से इस विशेष समय की आध्यात्मिक गंभीरता और शांति प्रभावित हो सकती है।
धार्मिक शास्त्रों की मानें तो पितृपक्ष के दौरान सादे और सात्विक कपड़े पहनना अच्छा होता है। पूजा-पाठ और तर्पण के दौरान सफेद, हल्का पीला या अन्य हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। सादे कपड़े में रहकर जब आप श्राद्ध करते हैं, तो पूरा ध्यान पितरों की सेवा पर ही रहता है।
मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान बाल और दाढ़ी नहीं कटाना चाहिए। इसके अलावा तामसिक भोजन मांस, अंडा, मछली का सेवन न करें। इसके अलावा लहसुन-प्याज से भी परहेज करना चाहिए। शराब और नशीली चीजों से भी दूरी बनाकर रखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं।
पितृपक्ष के दौरान घर का वातावरण शांत और पवित्र रखना चाहिए। किसी भी प्रकार का झगड़ा करना अशुभ माना जाता है। घर में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना चाहिए।
पितृपक्ष के दौरान असहाय को परेशान नहीं करना चाहिए। पशु-पक्षियों को भी प्रताड़ित न करें। ऐसा करने से पितृ दोष लग सकता है। पितृ पक्ष में पूर्वज अलग-अलग रूपों में अपने वंशजों से मिलने आते हैं, इसलिए विनम्र, ईमानदार और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना चाहिए। इस दौरान किसी को भी अपशब्द न कहें और झूठ न बोलने से बचें।
