Saturday, June 13, 2026
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पीएम मोदी के 12 साल: ‘स्वामित्व योजना’ बनी ग्रामीण सशक्तिकरण का ‘गेमचेंजर’, प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने में गुजरात नंबर-1

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गांधीनगर, 13 जून (आईएएनएस)। पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में जो बड़े कदम उठाए हैं, उनमें ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ एक ‘गेमचेंजर’ के रूप में सामने आई है। दशकों से गांवों में आवासीय संपत्तियों के सटीक कागजात न होने के कारण ग्रामीण अपने ही घरों के कानूनी अधिकारों और वित्तीय लाभों से वंचित थे। आज इस योजना के जरिए न सिर्फ ग्रामीणों को उनका असली हक मिल रहा है, बल्कि इस महाअभियान में गुजरात ने पूरे देश में ‘नंबर 1’ बनकर एक नया इतिहास भी रच दिया है।

गुजरात के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि योजना के दूसरे चरण में देशभर में जितने भी प्रॉपर्टी कार्ड बने हैं, उनमें से आधे से अधिक (50 प्रतिशत से अधिक) की हिस्सेदारी अकेले गुजरात की रही है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ को अभूतपूर्व गति देते हुए पूरे देश के सामने एक ‘रोल मॉडल’ पेश किया है। अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक से ग्रामीण संपत्तियों का सटीक मानचित्रण कर, राज्य सरकार की ओर से अब तक 18.50 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों के वैधानिक ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ तैयार किए जा चुके हैं।

साल 2021-22 में इस योजना के दूसरे चरण से जुड़ने वाला गुजरात आज अपने बेहतरीन प्रबंधन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस चरण में देशभर के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं और कुल 32,35,260 प्रॉपर्टी कार्ड बने। इनमें से अकेले गुजरात ने 14,900 गांवों में ड्रोन उड़ान और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण कर देश में सर्वाधिक 18,50,614 कार्ड तैयार किए हैं।

इस महाअभियान को सफल बनाने में भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गुजरात राजस्व विभाग और गुजरात पंचायती राज विभाग का बेहतरीन समन्वय रहा है। ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस आधारित मैपिंग ने ग्राम नियोजन को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। इस प्रक्रिया में जिला स्तर पर मेहसाणा (1,66,504 कार्ड) और अहमदाबाद (1,53,125 कार्ड) सबसे आगे हैं। इसके अलावा खेड़ा, बनासकांठा और आणंद में भी 1-1 लाख से अधिक कार्ड तैयार किए गए हैं। पारदर्शी सत्यापन के बाद कार्ड जारी होने से पीढ़ियों से चले आ रहे भूमि विवाद और अदालती मामले लगभग खत्म हो गए हैं।

इस योजना ने ग्रामीण संपत्तियों को एक ‘वित्तीय परिसंपत्ति’ में बदल दिया है। कानूनी मान्यता मिलने के बाद अब नागरिक अपने प्रॉपर्टी कार्ड का उपयोग कर बैंकों से आसानी से लोन की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। गुजरात में इस कार्ड के आधार पर 50 लाख रुपए तक के बड़े बैंक लोन भी स्वीकृत किए गए हैं।

इससे गांवों में व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिसने महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में एक ‘गेमचेंजर’ की भूमिका निभाई है। योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्यभर में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया है, जो ‘डिजिटल और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत’ के विजन को साकार कर रहा है।