Friday, July 31, 2026
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पीएम मोदी ने शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर किया नमन, बोले- ‘उनकी जीवनगाथा हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी’

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन किया है। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह को उनके बलिदान दिवस पर सादर नमन। हिम्मत और हौसले से भरी उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।”

पीएम मोदी ने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया, “न जातु शौर्यं पुरुषस्य भानुरस्तं गतो भवति कदापि शश्वत्। यथा पुनस्तपति दिवाकरोऽयं तथा पुनर्विक्रमते स वीरः॥”

इस ‘सुभाषितम्’ में कहा गया है कि वीर पुरुष का शौर्य रूपी सूर्य कभी स्थायी रूप से अस्त नहीं होता। जैसे सूर्य फिर से उदय होकर तपता है, वैसे ही वीर पुरुष हर परिस्थिति के बाद पुनः अपने पराक्रम से विजय प्राप्त करता है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी सरदार उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महान क्रांतिकारी, शहीद सरदार उधम सिंह जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप एक सशक्त, समरस, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारा प्रण है। उनका बलिदान और देशभक्ति सदैव प्रेरित करती रहेगी।”

26 दिसंबर 1899 को पंजाब में जन्मे उधम सिंह वो क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जलियांवाला बाग के शहीदों का प्रतिशोध लेकर भारत के स्वाभिमान को नई ऊंचाई दी। वे गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े थे। उन्‍होंने अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए 13 मार्च 1940 को ब्रिटिश पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की गोली मारकर हत्या कर दी।

माइकल ओ’डायर जलियांवाला हत्याकांड के समय पंजाब का गवर्नर था और वहां दमनकारी नीतियों का प्रमुख समर्थक था। बाद में जब उधम सिंह को गिरफ्तार किया गया था, तब उन्होंने कहा था कि यह जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के लिए न्याय था।

31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उधम सिंह को फांसी दे दी गई, तब उनकी आयु महज 40 साल थी। 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए। आज पूरा देश उधम सिंह के 87वें शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।