Wednesday, August 5, 2026
SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय ‘पीओके से एक सेब भी नहीं ला सके, कश्मीर को मिले सूबे...

‘पीओके से एक सेब भी नहीं ला सके, कश्मीर को मिले सूबे का दर्जा’, अधीर रंजन चौधरी

0
9

मुर्शिदाबाद, 5 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अमृतसर में आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुरक्षा खतरों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया और राम मंदिर दान विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणियों की आलोचना की।

मुर्शिदाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हमें आतंकी मॉड्यूल को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हम अभी तक आतंकवादी खतरे से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं। हमारे देश को पाकिस्तान और चीन की मदद से कमजोर करने के लिए कई तरह की साजिशें चल रही हैं और आतंकवादियों की सहायता की जा रही है। हमें चौकन्ना रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि धारा 370 हटाई गई थी और जब इसे हटाया गया था, तब मैं सदन में मौजूद था। इसके साथ ही 90 के दशक में सदन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी हमारा हिस्सा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर लेकर रहेंगे। मैंने सवाल पूछा था कि क्या आप पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद एक सेब के पेड़ से एक सेब भी तोड़कर ला सके? कश्मीर में सब कुछ सामान्य है, यह हम कहने की स्थिति में नहीं हैं। कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। सरकार ने वादा किया था, लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवादी हमले जारी हैं। कुछ दिन पहले ही अमरनाथ यात्रा में तैनात एक पुलिसकर्मी की हत्या हुई। इसके बाद मजदूरों की हत्या हुई। पहलगाम में भी बड़ी आतंकी घटना हुई थी। जिस सोच के साथ धारा 370 हटाई गई थी, उसका उद्देश्य आतंकवाद को समाप्त करना था, लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाएं जारी हैं। सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए।

अधीर रंजन चौधरी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री दिन को रात साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। बाबा गोरखनाथ से जुड़े होने के बावजूद मुख्यमंत्री लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जो राम भक्तों का अपमान है। लोग आस्था और श्रद्धा के साथ दान और चढ़ावा देते हैं। मंदिर की देखरेख के लिए सदन में एक समिति का गठन किया गया था और खुद प्रधानमंत्री ने सदन में खड़े होकर इसका ऐलान किया था। इस समिति को राम मंदिर के निर्माण और रखरखाव जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, तो आज वह पल्ला क्यों झाड़ रही है?

उन्होंने कहा कि दोष स्वीकार करना कोई गलत बात नहीं है, फिर भी मुख्यमंत्री योगी दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं। चोरी किसने की? यह घटना कैसे हुई? एसआईटी जांच से पहले एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई? लीपापोती करने की जगह सरकार को दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए।