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पोलैंड के साथ अहम खनिजों में सहयोग, रक्षा संवाद और व्यापार दोगुना करने पर जोर: सीबी जॉर्ज

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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग, रक्षा संवाद को मजबूत बनाने और द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने जैसे प्रमुख मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में भारत-पोलैंड के बीच हुए अहम समझौतों की जानकारी दी।

जॉर्ज ने कहा, “पीएम टस्क के साथ वित्तीय मंत्री और बहुत बड़ा बिजनेस डिलेगेशन है। ये दोनों देशों की आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की महत्ता दर्शाता है। प्रधानमंत्री के पोलैंड दौरे के दौरान द्विपक्षीय रिश्तों को नया आयाम मिला। पीएम अगस्त 2024 में वहां गए थे और ये 40 साल में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा था। द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया गया। एक्शन प्लान 2024-28 के लिए तैयार किया गया है। 2024 में कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मनाई।”

जॉर्ज ने कहा कि मध्य और पूर्वी यूरोप तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के भीतर, पोलैंड भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इसलिए, यह यात्रा न केवल हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि व्यापक ‘भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी’ के संदर्भ में भी काफी महत्वपूर्ण है।

सिबी जॉर्ज ने कहा कि यह यात्रा भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर है। भारत और पोलैंड के बीच वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 6.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। दोनों देश इसे दोगुना करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

जॉर्ज ने कहा, “व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग पर काफी ध्यान दिया गया। नए उभरते क्षेत्रों में ईवी बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और स्वच्छ तकनीकें शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत भारत में विकास के अवसरों को तलाशने के लिए आमंत्रित किया। दोनों लीडर्स ने मजबूत सप्लाई चेन, छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को समर्थन, नवाचार और डिजिटल बदलाव पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच व्यापार 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जबकि पोलैंड में भारतीय निवेश 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। दोनों पक्षों का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को दोगुना करना है। पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें रक्षा, एग्रीटेक, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, भारी मशीनरी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं।”

उन्होंने विज्ञान और नवाचार को द्विपक्षीय संबंधों का स्तंभ बताते हुए कहा, “फरवरी में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में पोलैंड के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को आगे बढ़ाते हुए, दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में शोध के लिए सहयोग करने पर सहमत हुए। साथ ही, वे स्टार्टअप साझेदारी को मजबूत करने और व्यवसायों, शोध संस्थानों तथा नवाचार इकोसिस्टम के बीच संबंधों को बढ़ावा देने पर भी सहमत हुए।”

उन्होंने वर्तमान बैठक की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए आगे कहा कि दोनों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और आतंकवादियों, उनके नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और उनकी फंडिंग के खिलाफ – अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप – ठोस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर केंद्रित, प्रभावी और सुधारवादी बहुपक्षवाद के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया। पोलैंड ने एक सुधारवादी और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का समर्थन किया, और दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए।

रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र को लेकर हुए समझौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, ” दोनों पक्ष गोपनीय जानकारी की सुरक्षा और आदान-प्रदान, महत्वपूर्ण खनिजों, अभिलेखीय सहयोग, तथा संस्कृति, विज्ञान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग से जुड़े समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं। पोलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते, यूरोपीय संघ के नए रणनीतिक एजेंडे, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी, तथा मोबिलिटी फ्रेमवर्क का स्वागत किया है, जो भारत और पोलैंड के संबंधों को और गहरा करेंगे।”