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पोलावरम परियोजना को लेकर जगन मोहन रेड्डी ने सीएम चंद्रबाबू पर साधा निशाना, लगाया प्रचार का आरोप

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अमरावती, 3 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पोलावरम परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की आलोचना की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में जगन ने आरोप लगाया कि सरकार पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना के पहले से मौजूद पंपों के जरिए गोदावरी का पानी पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल में छोड़कर इसे पोलावरम परियोजना से हासिल उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रही है।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पुरुषोत्तमपट्टनम से लगभग 3,500 क्यूसेक पानी पंप किया जा रहा है और इसके लिए इस्तेमाल होने वाली व्यवस्था नई नहीं है। उनके मुताबिक, पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना और उसके पंप पहले से मौजूद हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि पानी पोलावरम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण के जरिए नहीं आ रहा है, तो सरकार इसे पोलावरम का पानी बताकर प्रचार क्यों कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल से संबंधित बड़े कामों का बड़ा हिस्सा उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में ही पूरा हो चुका था। उन्होंने कहा कि उपलब्ध परियोजना ढांचे का इस्तेमाल कर मौजूदा सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में इसका प्रचार कर रही है। जगन ने कहा कि लेफ्ट मेन कैनाल से जुड़े करीब 79 प्रतिशत बड़े कार्य वाईएसआर के कार्यकाल में पूरे हो चुके थे।

जगन ने 2014-19 के दौरान पोलावरम परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि उस अवधि में परियोजना में कथित गलत योजना, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण राज्य को नुकसान उठाना पड़ा।

जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, पिछली टीडीपी सरकार ने स्पिलवे और कॉफ़रडैम का काम पूरा किए बिना डायफ्राम वॉल का निर्माण शुरू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ के दौरान अधूरे स्पिलवे और कॉफ़रडैम के कारण नदी के पानी का प्रबंधन ठीक से नहीं हो पाया और पानी परियोजना के संवेदनशील हिस्सों तक पहुंचा। इससे मुख्य बांध की नींव और डायफ्राम वॉल को नुकसान पहुंचने का दावा भी उन्होंने किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहले अप्रोच चैनल, स्पिल चैनल, स्पिलवे और कॉफ़रडैम से जुड़े कार्यों को पूरा करने पर ध्यान दिया। इसके बाद मुख्य बांध के कठिन कार्यों को चरणबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार फिर से परियोजना को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रही है।

जगन ने पोलावरम परियोजना के जलस्तर को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पोलावरम का निर्धारित फुल रिजर्वायर लेवल 45.72 मीटर है, जबकि पानी के भंडारण को 41.15 मीटर तक सीमित किए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि परियोजना में पानी का भंडारण 41.15 मीटर तक ही सीमित रहता है तो पोलावरम को उसकी पूरी क्षमता के साथ कैसे संचालित किया जाएगा। उन्होंने केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पैकेज को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

जगन मोहन रेड्डी ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पैकेज के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि जब तक परियोजना को उसकी निर्धारित क्षमता और ऊंचाई तक पूरा नहीं किया जाता, तब तक पोलावरम के वास्तविक लाभों को पूरी तरह हासिल करना मुश्किल होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तरांध्र के विकास और सिंचाई के लिए केवल पुरुषोत्तमपट्टनम पंपों के जरिए पानी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है।

जगन ने दावा किया कि वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने वर्ष 2009 में उत्तरांध्र सुजला श्रवंती योजना के लिए 7,214.10 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बदलती कीमतों, भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2022 में परियोजना की अनुमानित लागत संशोधित कर 17,050.20 करोड़ रुपये की और प्रशासनिक मंजूरी दी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल में परियोजना के पैकेज-1 और पैकेज-2 से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को टेंडर और एग्रीमेंट के चरण तक पहुंचाया गया था। भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए विशेष इकाइयां बनाए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

जगन ने सवाल किया कि सत्ता में आने के बाद चंद्रबाबू नायडू सरकार ने उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना को प्राथमिकता क्यों नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तरी आंध्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता केवल भाषणों तक सीमित दिखाई देती है।

जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू से पोलावरम परियोजना को लेकर ‘ड्रामा’ बंद करने और निर्माण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि परियोजना को निर्धारित 45.72 मीटर FRL तक पूरा किया जाना चाहिए, ताकि जलाशय में उसकी पूरी क्षमता के अनुरूप पानी का भंडारण किया जा सके।

उनका तर्क है कि पोलावरम को उसकी निर्धारित ऊंचाई तक पूरा करने के बाद दाईं और बाईं मुख्य नहरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति गुरुत्वाकर्षण के जरिए की जा सकेगी। इससे पुरुषोत्तमपट्टनम और पुष्करा जैसी लिफ्ट योजनाओं पर निर्भरता कम हो सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पोलावरम की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आएगी जब जलाशय अपनी निर्धारित क्षमता तक पानी संग्रहित कर सके और दोनों मुख्य नहरों के जरिए व्यापक क्षेत्र को गुरुत्वाकर्षण आधारित सिंचाई एवं जलापूर्ति मिल सके।