पोरबंदर, 29 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के पोरबंदर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट क्रैश जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए मल्टी-एजेंसी फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका मकसद इमरजेंसी तैयारियों, रिस्पॉन्स और एजेंसियों के बीच तालमेल को परखना था।
सीआईएसएफ ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा गया, “तैयारी अभ्यास के जरिए, तत्परता समन्वय के जरिए।”
इस ड्रिल में सीआईएसएफ की क्यूआरटी टीम, एएआई फायर सर्विसेज, सिटी फायर सर्विसेज, लोकल पुलिस और मेडिकल टीमों ने सिम्युलेटेड इमरजेंसी पर तुरंत रिस्पॉन्स दिया। सभी ने एसओपी के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए साइट को सुरक्षित किया।
सीआईएसएफ ने बताया कि इस अभ्यास ने सभी हितधारकों के बीच सहज समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत किया है। मॉक ड्रिल का समापन एक डीब्रीफिंग सत्र के साथ हुआ, जिसमें रिस्पॉन्स की समीक्षा की गई और तैयारियों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
यह मल्टी-एजेंसी ड्रिल सीआईएसएफ के साथ-साथ एयरपोर्ट फायर सर्विस, लोकल पुलिस और मेडिकल टीमों के रैपिड रिस्पॉन्स, परिमीटर कंट्रोल और रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन को टेस्ट करने के लिए थी।
बता दें कि यह लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट क्रैश की मल्टी-एजेंसी फायर मॉक ड्रिल एक फुल-स्केल ट्रेनिंग एक्सरसाइज है, जो बड़ी विमान दुर्घटना पर इमरजेंसी सेवाओं के रिस्पॉन्स को परखती है। भारतीय हवाईअड्डों पर सीआईएसएफ के नेतृत्व में इसमें आग बुझाना, घायलों को निकालना, क्रैश साइट को सुरक्षित करना और एएआई, पुलिस एवं मेडिकल टीमों के बीच तालमेल का परीक्षण किया जाता है।
यह ड्रिल इमरजेंसी मैनेजमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होती है।
