रांची, 22 जून (आईएएनएस)। झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, आस्था स्थलों और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा के मयूरभंज जिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ संथाली ‘जाहेर स्थल’ पर प्रधानमंत्री द्वारा पूजा-अर्चना करना आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का बड़ा प्रतीक है। आदित्य साहू ने सोमवार को कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह संभवतः पहला अवसर है, जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के इन पवित्र आस्था स्थलों पर जाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे देश की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय विमर्श में महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण स्थान मिला है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संथाल और ‘हो’ आदिवासी समुदायों के लिए जाहेर स्थल केवल धार्मिक महत्व के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे उनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी मुख्य आधार हैं। इन स्थलों से समुदाय की पूरी जीवनशैली, प्राचीन परंपराएं, और सामाजिक व्यवस्थाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का वहां पहुंचना आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान के प्रति देश के सर्वोच्च सम्मान का संदेश देता है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय इतिहास और सार्वजनिक स्मृति में उचित स्थान दिलाने की दिशा में लगातार कई बड़े कदम उठाए हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने, आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित विशेष संग्रहालयों की स्थापना और विभिन्न जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह आदिवासी विरासत को सहेजने की एक व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।
साहू ने यह भी कहा कि द्रौपदी मुर्मु का देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनना और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना भी केंद्र सरकार की इसी सकारात्मक सोच को दर्शाता है। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार तथा सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भारी निवेश के माध्यम से केंद्र सरकार जनजातीय समाज के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं है, बल्कि वह भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का सबसे महत्वपूर्ण वाहक है। प्रधानमंत्री का आदिवासी आस्था स्थलों पर माथा टेकना इसी संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।

