Thursday, July 30, 2026
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प्रदूषण और साइनस से राहत के लिए आयुष मंत्रालय की सलाह, अपनाएं जलनेति क्रिया

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नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। कई बार आपके आसपास लोग बढ़ते प्रदूषण और साइनस की समस्याओं से परेशान दिखाई देते हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ऐसी परेशानियों के लिए एक आसान और प्राचीन विधि ‘जलनेति’ अपनाने की सिफारिश की है। यह क्रिया नाक के मार्ग को गहराई से साफ करती है और श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। नियमित अभ्यास से मानसिक स्पष्टता भी बढ़ती है।

यह घर पर आसानी से की जा सकती है। आयुष मंत्रालय इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह देता है, खासकर प्रदूषित शहरों में रहने वालों के लिए। नियमित अभ्यास से श्वास स्वच्छ और सहज बनी रहती है।

मंत्रालय के अनुसार, जलनेति योग की एक महत्वपूर्ण शुद्धिकरण क्रिया (षट्कर्म) है, जिसमें गुनगुने नमक मिले पानी से नासिका मार्ग की सफाई की जाती है। आयुष मंत्रालय इसे प्रदूषण, धूल-मिट्टी और एलर्जी से बचाव का प्राकृतिक उपाय बताता है।

एक्सपर्ट के अनुसार, जलनेति के लिए सबसे पहले कागासन की मुद्रा में बैठ जाएं। पैरों के बीच अंतर रखें। आगे झुकें और सिर को सक्रिय नासिका (जिससे सांस आसानी से आ रही हो) के विपरीत दिशा में हल्का झुकाएं। इसके बाद विशेष पात्र नेति पॉट की टोंटी सक्रिय नासिका में लगाएं। मुंह थोड़ा खोल लें और मुंह से ही सांस लें और छोड़ें। पानी एक नासिका से अंदर डालें और दूसरी से बाहर निकालें। आधा पात्र खाली होने पर नाक साफ करें और प्रक्रिया दूसरी नासिका से दोहराएं। अंत में कपालभाति प्राणायाम करें, ताकि पानी की बची बूंदें निकल जाएं।

जलनेति के दौरान सावधानी भी जरूरी है। इसके लिए पानी गुनगुना और उचित मात्रा में नमक मिला यानी आधा चम्मच नमक प्रति लीटर होना चाहिए। पहली बार किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करें।

जलनेति क्रिया से कई लाभ मिलते हैं। इससे नाक की गहरी सफाई होती है, जिससे प्रदूषण, धूल और बैक्टीरिया निकलते हैं।

साइनसाइटिस, एलर्जी, सर्दी-जुकाम, नाक बंद रहना और छींक जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। श्वसन तंत्र मजबूत होता है, दमा और ऊपरी श्वसन संक्रमण में भी लाभकारी है। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है, सिरदर्द और माइग्रेन के दर्द में राहत मिलती है। मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और तनाव में कमी आती है।